नगर पालिका गरियाबंद के सहायक अभियंता रिश्वत लेते गिरफ्तार : अब “पटकथा लेखक” की चर्चा तेज

वर्षों से नगर पालिका गरियाबंद में सहायक अभियंता का पद रिक्त होने का इतिहास भी सवालों के घेरे में है ..

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गरियाबंद। नगर पालिका परिषद गरियाबंद में निर्माण कार्यों को लेकर लगातार उठते रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच शुक्रवार को एसीबी की कार्रवाई ने एक बार फिर सनसनी फैला दी। नगर पालिका में पदस्थ सहायक अभियंता संजय मोटवानी को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुये एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 

नगर पालिका परिषद गरियाबंद में एसीबी की कार्यवाही

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ठेकेदार अजय गायकवाड़ की शिकायत पर की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने शौचालय निर्माण का कार्य पूरा कर लिया था, जिसके बाद फाइनल बिल के भुगतान के लिये सहायक अभियंता मोटवानी द्वारा 50 प्रतिशत हिस्से की मांग की गई। अजय ने यह स्वीकारा कि वह नॉर्मल कमीशन देने तैयार था, किंतु मोटवानी द्वारा 50 प्रतिशत की मांग पर वह सहमत नहीं हुआ। इसके बाद उसने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाते हुये कार्रवाई की।

ठेकेदार अजय गायकवाड़

नगर में उठ रहे नये सवाल

एसीबी द्वारा की गई कार्रवाई के बाद नगर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम का “स्क्रिप्ट राइटर” कौन है? वर्षों से नगर पालिका में सहायक अभियंता का पद रिक्त होने का इतिहास भी सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी इस पद पर नियुक्त अधिकारी अधिक समय तक टिक नहीं पाये थे। संजय मोटवानी की भी कुछ माह पूर्व ही यहां पदस्थापना हुई थी, लेकिन वे यहां का माहौल समझ नहीं पाये—ऐसा माना जा रहा है।

पालिका के अंदरूनी हालात पर भी उंगलियां उठीं

नगर पालिका परिषद गरियाबंद में प्लेसमेंट के माध्यम से 58 कर्मचारी वर्षों से कार्यरत हैं, जबकि विभागीय स्थायी अधिकारी–कर्मचारी केवल 6–7 हैं। सवाल यह है कि नॉर्मल कमीशन का खेल आखिर कौन चलाता था ? ठेकेदार द्वारा “प्रचलित कमीशन” देने की बात स्वीकार करने के बाद अब जांच इस दिशा में भी बढ़ सकती है कि कही यह विवाद कमीशन के बँटवारे की खींचतान का परिणाम तो नहीं?

सूत्रों के अनुसार, एसीबी की टीम अब यह भी जांच सकती है कि पहले कितनों से कमीशन लिया गया, किन-किन निर्माण कार्यों में देरी हुई और इस चक्र में कौन-कौन लोग शामिल रहे?

तालाबों की दुर्दशा और औचित्यहीन निर्माण भी सवालों के घेरे में

सवाल है कि लाखों की शासकीय स्वीकृति के बावजूद नगर के तालाबों की दुर्दशा जस की तस बनी हुई है। रावनभाटा क्षेत्र में एनएच किनारे बने “फौव्वारानुमा औचित्यहीन निर्माण” का जिम्मेदार कौन है—यह भी बड़ा सवाल है।

कुछ तो गड़बड़ है दया

सहायक अभियंता संजय मोटवानी की रंगे हाथों गिरफ्तारी, नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को इंगित करती है । इस कार्रवाई ने कई नये सवाल खड़े कर दिये हैं।


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