वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय अपराधों पर अंकुश लगाने की अभिनव पहल को मिली पहचान
गरियाबंद। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्यों के लिये छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को प्रतिष्ठित ‘नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है। रिजर्व को यह सम्मान उसके अभिनव लैंडस्केप सिक्योरिटी मॉडल के लिए प्रदान किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित सम्मान के लिये देशभर से 26 व्यक्तियों एवं संस्थाओं का चयन किया गया था।
यह पुरस्कार वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और संगठित पर्यावरणीय अपराधों पर नियंत्रण के लिये टाइगर रिजर्व द्वारा अपनाई गई प्रभावी कार्यप्रणाली के लिये दिया गया है। पूर्व यूपीएससी अध्यक्ष दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली जूरी ने इस मॉडल का चयन किया।
टाइगर रिजर्व द्वारा विकसित इस मॉडल के तहत पारंपरिक वन एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीक और खुफिया सूचनाओं का उपयोग किया जा रहा है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्विलांस,जीआईएस मैपिंग और डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से वन क्षेत्रों की निगरानी की जाती है, साथ ही अवैध शिकार,लकड़ी तस्करी, अवैध खनन,वन भूमि पर अतिक्रमण,मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क पर भी नजर रखी जाती है।
इस अभियान में वन विभाग की टीम द्वारा राज्य पुलिस, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जाती है। इससे दुर्गम वन क्षेत्रों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करने में मदद मिल रही है।
नेक्सस ऑफ गुड फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल स्वरूप ने जूरी के निर्णय की जानकारी देते हुये टाइगर रिजर्व के उप संचालक एवं पूरी टीम को बधाई दी है।
यह सम्मान टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ अग्रिम पंक्ति में तैनात वनकर्मियों और मैदानी अमले के सामूहिक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। इससे वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिये किये जा रहे प्रयासों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

