विशेष लोक अदालत : 847 चेक बाउंस के प्रकरण में 22 करोड़ रुपये से अधिक का निपटारा

लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निराकरण का महत्व इसलिये भी है कि ऐसे मामलों में अपील का प्रावधान नहीं है। लोक अदालत का आदेश अंतिम होता है।

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चेक बाउंस के संबंध में विशेष लोक अदालत का आयोजन

रायपुर / गरियाबंद। शनिवार 18 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के मामलों के संबंध में विशेष लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय रायपुर में किया गया। उक्त कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीपति छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया ।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री बलराम प्रसाद वर्मा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विनय प्रधान,अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.), आनंद कुमार सिंह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,अविनाश कुमार दुबे सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।

चेक बाउंस के अधिक से अधिक मामलों के निराकरण के लिये जिला न्यायालय रायपुर में 19 विशेष खण्डपीठों का गठन किया गया था, जिसमें लगभग 1800 मामलों को रखा गया तथा पक्षकारों के आपसी राजीनामा एवं समझौता के आधार पर कुल 847 चेक बाउंस के प्रकरणों का निराकरण किया गया।

उक्त 847 चेक बाउंस के प्रकरण में कुल समझौता राशि 22,79,86,157/- (बाईस करोड़ रूपये से अधिक) का विशेष लोक अदालत के माध्यम से निपटारा हुआ । लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निराकरण का महत्व इसलिए भी है कि ऐसे मामलों में अपील का प्रावधान नहीं है। लोक अदालत का आदेश अंतिम होता है।

विवाद के पक्षकारों के मध्य की कटुता व वैमनस्यता समाप्त होती है तथा विवाद का अंतिम रूप से निराकरण हो जाता है। सभी लोक अदालत हाईब्रिड मोड से होने के कारण पक्षकारों को भौतिक एवं वर्चुवल रूप से उपस्थित होने की सुविधा मिलती है, जिससे भी लोक अदालत के माध्यम से निराकरण होने वाले प्रकरणों की संख्या में अभिवृद्धि हो रही है।

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