मैं….अप्रैल 2026 तक अरबपति बनूँगी : अमीर बनने की सनक, पिता-पुत्री की ठग जोड़ी

“मैं गरिमा सिंह अप्रैल 2026 तक अरबपति बनूँगी, यह मेरा लक्ष्य है। अप्रैल से मई तक मेरा लक्ष्य 100 करोड़ ₹ कमाना है। गरिमा सिंह करोड़पति है। धन्यवाद भगवान।,,

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की गरिमा सिंह और उसके पिता की ठगी की ये दास्तान बेहद रोचक है। हालांकि ठगी और धोखाधड़ी की इस सिलसिलेवार कहानी का अंत हो चुका है,गरिमा और उसके पिता ध्रुवनारायण सिंह को पुलिस ने अगस्त 2026 में करोड़ों रुपयों की ठगी और धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है।

अरबपति बनने की चाह में इस बाप-बेटी ने आरबीआई की फर्जी योजनाओं और बैंक लोन के नाम अनेक लोगों से करोड़ों रुपयों की ठगी की है, ठगे गये लोगों में उनके परिचित और रिश्तेदार भी है।

आपको बता दें कि ध्रुवनारायण सिंह रेलवे में स्टेशन अधीक्षक है,जो अपने ही विभागीय सहकर्मियों,अधिकारियों और परिचितों को अपनी बेटी के ठगी के जाल में फंसाते थे।

गरिमा सिंह लोगों को आरबीआई की फर्जी योजनाओं में 8% तक मुनाफ़े का लालच देती थी,इसके साथ ही वह लोगों को बैंकों से भारी-भरकम लोन दिलाने और उसे माफ कराने का झांसा देती थी। जाल में फंसे लोगों के नाम, लोन लेकर वह उसका अधिकांश हिस्सा अपने एकाउंट में ट्रांसफर करवा लेती थी।

अगस्त 2026 में जैसे ही इस पिता-पुत्री की जोड़ी को पुलिस ने गिरफ्तार किया, उसके बाद से लगातार शिकायतों के आधार पर इन पर गंभीर धाराओं में कई अपराध दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने जांच के दौरान गरिमा की एक डायरी भी जब्त की है, जिसमें अरबपति बनने के बड़े-बड़े लक्ष्य और करोड़पति बनने की योजनायें लिखी हुई थी।

बताया जा रहा है कि गरिमा सिंह हॉलीवुड की मशहूर लेखिका रोंडा बर्न की प्रसिद्ध किताब द सीक्रेट और उसके “लॉ ऑफ अट्रैक्शन, के सिद्धांत से बेहद प्रभावित रही। पुलिस के द्वारा जांच के दौरान जब्त गरिमा की डायरी में – उसने लिखा था – “मैं गरिमा सिंह अप्रैल 2026 तक अरबपति बनूँगी, यह मेरा लक्ष्य है। अप्रैल से मई तक मेरा लक्ष्य 100 करोड़ ₹ कमाना है। गरिमा सिंह करोड़पति है। धन्यवाद भगवान।,,

पुलिस के अनुसार गरिमा ने लोगों बड़े वित्तीय जाल में फंसाने का तरीका अखबारी खबरों, इंटरनेट और यूट्यूब से सीखा था।

इस बाप बेटी ने अपने ही करीबी परिचितों,रिश्तेदारों और विभागीय सह-कर्मियों को अपने जाल में फंसाया। इनके द्वारा अब तक 10 से 15 लोगों से तकरीबन 10 करोड़ ₹ की ठगी की है। गरिमा अपने जाल में फंसे पीड़ितों के पर्सनल डॉक्यूमेंट ले लेती थी और एक ही समय पर उनके नाम अलग-अलग बैंकों में लोन के लिये अप्लाई कर देती थी।

फिर जब बैंकों से एक साथ लाखों करोड़ों का लोन पीड़ितों के खाते में आ जाता, तब गरिमा उन्हें तकनीकी गलती से आया बताकर अपने खाते में ट्रांसफर करवा लेती थी। बाद में जब पीड़ितों को एक ही लोन के लिये अलग अलग बैंकों से ईएमआई जमा करने के लिये फोन आने शुरू हुये तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।

ईन दोनों बाप-बेटी के विरुद्ध गोरखपुर के तिवारीपुर थाने में हालिया दर्ज एफआईआर के साथ कुल 07 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। गोरखपुर पुलिस को इस मामले में कुछ बैंक कर्मियों/अधिकारियों के भी संलिप्त होने का संदेह है।


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