शबनम अली : क्या सचमुच आजाद भारत की पहली महिला है, जिसे फांसी की सजा मिली है..

हालांकि शबनम की फांसी तारीख अभी तय नहीं है, किन्तु निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, दोनों की मौत की सजा…

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उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिला अंतर्गत बावनखेड़ी हत्याकांड, भारत के सबसे जघन्य अपराधों में से एक माना जाता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत इस हत्याकांड के दोषियों – शबनम अली और उसके प्रेमी सलीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।

हालांकि शबनम की फांसी तारीख अभी तय नहीं है, किन्तु निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, दोनों की मौत की सजा को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा राष्ट्रपति द्वारा भी दया याचिका खारिज कर दी गई है। फिलहाल शबनम कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत जेल में बंद है।

मां-बाप, भाई-भाभी सहित नन्हें भतीजे की हत्या

उक्त पारिवारिक हत्याकांड की घटना को वर्ष 2008 के अप्रैल महीने की 14 -15 तारीख की दरमियानी रात को अंजाम दिया गया था। शबनम ने अपने माता – पिता, दो भाई, भाभी और 10 महीने के भतीजे को पहले चाय/दूध में नशीला पदार्थ खिलाया, फिर सभी के अचेत होने पर, अपने प्रेमी के साथ मिलकर 6 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला। 10 महीने के भतीजे का गला घोंट दिया।

सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कि वह आजाद भारत की पहली महिला होगी जिसे फांसी दी जायेगी, किन्तु तथ्य कहते हैं कि आजाद भारत में पहले भी महिलाओं को फांसी दी गई है। अब तक शबनम की फांसी की तारीख तय नहीं है।

अंग्रेजी और भूगोल विषय में डबल एम ए शिक्षित शबनम, स्थानीय किसी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाती थी। गांव के ही 6वीं पास मजदूर सलीम के साथ उसका प्रेम संबंध रहा। शबनम का परिवार दोनों के प्रेम संबंध और शादी के विरुद्ध था।

सलीम के प्यार में पागल शबनम ने योजना बनाकर अपने परिजनों – पिता शौकत अली,मां हाशमी,दो भाई अनीस और राशिद,ममेरी बहन राबिया,भाभी अंजुम, और भतीजे की नृशंस हत्या कर दी, जिसमें सलीम ने उसका साथ दिया।

घटना की अगली सुबह शबनम ने, पुलिस और अन्य सभी को गुमराह करने की नियत से शोर मचाकर बताया – कि अज्ञात लुटेरों ने उसके घर पर हमला किया और सबको मार डाला। हालांकि पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से 4 दिनों में ही उसका झूठ पकड़ा गया, और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।


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