5 गुमशुदा किशोरियों की सुरक्षित वापसी : काम दिलाने के बहाने ले गये थे तमिलनाडु

कलेक्टर गरियाबंद के निर्देशों के अनुसार गुमशुदगी के मामलों में वास्तविक कारणों की जांच की जायेगी। ऐसे मामलों विशेष रूप से..

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किरीट ठक्कर, गरियाबंद। जिले के देवभोग विकासखंड के सुदूर गांवों से 5 किशोरियों के लापता होने की जानकारी जिला प्रशासन के समक्ष आई थी,जिस पर टास्क फोर्स समिति की बैठक के दौरान जिले के लापता व्यक्तियों की सुरक्षित वापसी के समन्वित प्रयास के निर्देश कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा दिये गये थे।

ईन समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप आज तमिलनाडु से 5 किशोरी / बालिकाओं को सुरक्षित वापस लाया गया है। इनमें से 3 बालिकाओं के नाबालिग और 2 किशोरियों के बालिग होने की जानकारी सामने आयी है। बताया जा रहा है कि मैनपुर व देवभोग ब्लॉक के कुछ गांव तुवासमाल सेन्दमुड़ा गाडाघाट जैसे कुछ गांवों में ओडिसा के एक या दो दलाल सक्रिय हैं,जो युवतियों को तमिलनाडु में सिलाई का काम दिलाने और अच्छा मेहनताना दिलाने के नाम पर बहला फुसलाकर अन्य प्रदेशों में ले जाते हैं।

हालिया बरामद 5 किशोरी बालिकाओं के मामले में यही तथ्य सामने आये हैं, इन्हें तमिलनाडु के कोयम्बटूर जिले में सिलाई का काम दिलाने के नाम पर ले जाया गया था। किन्तु 3 नाबालिग किशोरियों को तथाकथित सिलाई वर्कशॉप में नाबालिग होने की वजह से काम नही दिया गया,और इसके बाद अनजान प्रदेश में इन किशोरी बालिकाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परिजनों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की ये 5 किशोरियां अगस्त माह के पहले सप्ताह में किसी दलाल के साथ तमिलनाडु के लिये निकली थी। लगभग एक माह बाद जिला प्रशासन की सक्रियता से इनकी वापसी हो पाई है।

जिले से 43 गुम ..अब सभी बरामद

आपको बता दें कि 9 सितम्बर को टास्क फोर्स समिति की बैठक में कलेक्टर शर्मा ने अंतरराज्यीय स्तर पर गुम व्यक्तियों की जानकारी ली थी। बैठक में बताया गया था कि जिले से 43 बालिकाओं के गुम होने के प्रकरणों में से 38 बालिकाओं को बरामद किया जा चुका है। 5 नये प्रकरणों की जानकारी सामने आई थी। अब तमिलनाडु से 5 किशोरियों की सुरक्षित बरामदगी के साथ गुम/लापता का आंकड़ा शून्य माना जा सकता है।

तमिलनाडु से गुम बालिकाओं की सुरक्षित वापसी के लिये श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग,पुलिस विभाग एवं जिला बाल कल्याण समिति का समन्वित प्रयास रहा है।

कलेक्टर गरियाबंद के निर्देशों के अनुसार गुमशुदगी के मामलों में वास्तविक कारणों की जांच की जायेगी। ऐसे मामलों विशेष रूप से बंधुआ मजदूरी,अपहरण, प्रेम प्रसंग, अवैध मानव व्यापार एवं अन्य प्रकार के शोषण से जुड़े पहलुओं की जांच आवश्यक है।

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