महिला वनबल के नेतृत्व में 106 हेक्टेयर अतिक्रमित कोर क्षेत्र की वनभूमि मुक्त

मुक्त कराया गया क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह “हाथी कॉरिडोर, का हिस्सा है तथा “महानदी के उद्गम क्षेत्र के निकट,स्थित है।

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USTR में 166 आरोपियों के अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई — ISRO सैटेलाइट इमेजरी और DGPS ड्रोन मैपिंग से हुई वैज्ञानिक माप एवं सीमांकन

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के “सीतानदी कोर रेंज, में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिये आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुये लगभग “106 हेक्टेयर अतिक्रमित वन क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।, यह कार्रवाई जिला प्रशासन एवं पुलिस के सहयोग से USTR द्वारा की गई। अभियान की विशेष उपलब्धि यह रही कि “चार वन प्रभागों की महिला वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अभियान का नेतृत्व करते हुये मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया।,

चार वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि अतिक्रमण से मुक्त

सीतानदी कोर रेंज की 106 हेक्टेयर भूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई USTR द्वारा पिछले चार वर्षों में चलाए जा रहे “व्यापक अतिक्रमण-विरोधी अभियान, का हिस्सा है। इस अवधि में USTR द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में “1,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है।,

USTR द्वारा अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ ऐसे क्षेत्रों में “वैज्ञानिक सीमांकन, कानूनी कार्रवाई तथा ecological restoration,पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि मुक्त कराये गये वन क्षेत्र को दोबारा अतिक्रमण से सुरक्षित रखते हुये वन्यजीव आवास के रूप में पुनर्स्थापित किया जा सके।

सीतानदी कोर क्षेत्र की वर्तमान कार्रवाई इसी दृष्टिकोण का उदाहरण है, जहां अतिक्रमण हटाने के बाद “जल संरक्षण संरचनाओं, contour trenches और वृक्षारोपण, के माध्यम से क्षेत्र का पुनर्स्थापन भी प्रारंभ किया गया है।

यह क्षेत्र वर्ष “2011–13 के दौरान अतिक्रमण की शुरुआत, से प्रभावित था। उस समय दर्ज किये गये POR के अनुसार अतिक्रमण का क्षेत्रफल लगभग “45 हेक्टेयर, था। पिछले लगभग 15 वर्षों में अतिक्रमण बढ़कर लगभग “106 हेक्टेयर, तक पहुंच गया। इस प्रकार वन क्षेत्र में समय के साथ हुये परिवर्तन एवं अतिक्रमण के विस्तार का वैज्ञानिक रूप से आकलन किया गया।

ISRO इमेजरी और DGPS ड्रोन मैपिंग से हुआ वैज्ञानिक सीमांकन

USTR ने अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति एवं समय के साथ हुये विस्तार का आकलन करने के लिये “ISRO की सैटेलाइट इमेजरी, तथा “DGPS-enabled drone mapping, का उपयोग किया।

विभिन्न वर्षों की सैटेलाइट इमेजरी का “temporal analysis, कर वन क्षेत्र में हुये परिवर्तन का अध्ययन किया गया तथा ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से अतिक्रमित क्षेत्र का “सटीक सीमांकन और क्षेत्रफल निर्धारण,किया गया। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया से अतिक्रमण के विस्तार, उसकी स्थिति तथा वर्तमान क्षेत्रफल का दस्तावेजीकरण किया गया।

166 आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई

इस प्रकरण में कुल “166 आरोपी, चिन्हित किये गये हैं। कार्रवाई के दौरान अब तक “40 आरोपियों की गिरफ्तारी, की जा चुकी है।

अतिक्रमण से संबंधित प्रकरणों में सभी “166 आरोपियों द्वारा प्रस्तुत Anticipatory Bail Applications को माननीय नगरी न्यायालय द्वारा खारिज किया गया था।, इसके पश्चात माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आरोपियों को इस शर्त के साथ अग्रिम जमानत प्रदान की गई कि वे जांच एवं विवेचना में सहयोग करेंगे।

USTR द्वारा वैज्ञानिक साक्ष्यों, मैदानी अभिलेखों एवं उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों के आधार पर प्रकरणों में आगे की कार्रवाई जारी है।

अतिक्रमण हटाने के साथ शुरू हुआ पारिस्थितिक पुनर्स्थापन

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को केवल भूमि खाली कराने तक सीमित न रखते हुए USTR ने क्षेत्र में “ecological restoration, का कार्य भी प्रारंभ किया है।

पुनर्स्थापन कार्यों में—

* “Contour trenches, का निर्माण, जिससे वर्षाजल का संचयन एवं मृदा-नमी संरक्षण हो सके;
* महानदी बेसिन में जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना;
* लगभग “1,500 पौधों का रोपण,
* प्राकृतिक वनस्पति के पुनर्जीवन एवं वन्यजीव आवास की बहाली जैसे कार्य शामिल हैं।

हाथी कॉरिडोर और महानदी उद्गम क्षेत्र के निकट महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास

मुक्त कराया गया क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह “हाथी कॉरिडोर, का हिस्सा है तथा “महानदी के उद्गम क्षेत्र के निकट,स्थित है।

ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन आवास का क्षरण वन्यजीवों की आवाजाही, जल उपलब्धता और मानव-वन्यजीव संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। USTR का दायित्व केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि “वन्यजीव आवास को उसके प्राकृतिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करना,भी संरक्षण प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वस्थ एवं निरंतर वन आवास की बहाली से वन्यजीवों के लिए उपलब्ध क्षेत्र बढ़ता है और आवास विखंडन के कारण उत्पन्न होने वाले “मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलती है।,

महिला वनबल ने संभाली अभियान की कमान

इस अभियान की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि “धमतरी,गरियाबंद, कांकेर तथा Udanti-Sitanadi Tiger Reserve, से तैनात महिला वन अधिकारियों एवं वनकर्मियों ने अभियान का नेतृत्व किया।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशील वन क्षेत्र में महिला वनबल ने समन्वित रूप से कार्रवाई को संचालित किया और अतिक्रमण हटाने एवं क्षेत्र को पुनः वन प्रबंधन के अधीन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्थानीय ग्रामीणों का मिला सहयोग

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में “घुरावाड़, बरबंधा और भुरसीडोंगरी,, गांवों के ग्रामीणों ने भी वन विभाग का सहयोग किया। स्थानीय समुदाय का सहयोग वन क्षेत्र की सुरक्षा और दीर्घकालिक संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण है।

USTR द्वारा अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान, वैज्ञानिक निगरानी, कानूनी कार्रवाई और क्षतिग्रस्त वन्यजीव आवास के पुनर्स्थापन की कार्रवाई आगे भी जारी रखी जायेगी।

पिछले चार वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराना USTR के सतत संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा

वर्तमान 106 हेक्टेयर की कार्रवाई इस प्रयास को और मजबूत करती है तथा यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है कि पुनः प्राप्त वनभूमि भविष्य में वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिये सुरक्षित रहे।

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