न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद भी कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग : कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत

आवेदिका ने प्रशासन को 48 पृष्ठों के सहायक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुये अवैध प्लाटिंग के इस पूरे खेल में शामिल विक्रेताओं और खरीदारों के खिलाफ..

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किरीट ठक्कर,​गरियाबंद। गरियाबंद तहसील अंतर्गत ग्राम पारागांव में न्यायालयीन प्रक्रिया और स्थगन (स्टे) आदेश की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग और जमीन की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। इस संबंध में आवेदिका मोतिम साव ने कलेक्टर जनदर्शन में मय दस्तावेजों के लिखित शिकायत सौंपकर अवैध प्लाटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों व जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

​न्यायालय में विचाराधीन है 2.81 हेक्टेयर भूमि

जनदर्शन में सौंपे गये आवेदन के अनुसार, ग्राम पारागांव (पटवारी हल्का नंबर 08, तहसील व जिला गरियाबंद) स्थित खसरा नंबर 297, 343, 565 एवं 759 (कुल रकबा 2.81 हेक्टेयर) को लेकर गरियाबंद व्यवहार न्यायालय में सिविल प्रकरण विचाराधीन है। आरोप है कि प्रकरण लंबित होने के बावजूद प्रतिवादियों द्वारा उक्त भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अवैध प्लाटिंग की गई और नियम विरुद्ध तरीके से कई लोगों को इसकी रजिस्ट्री कर दी गई।

​स्टे के बाद भी करा दी गई रजिस्ट्री

शिकायतकर्ता का आरोप है कि व्यवहार न्यायालय द्वारा 2 सितंबर 2026 को स्थगन आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद बेखौफ कॉलोनाइजरों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 7 सितंबर 2026 को खसरा नंबर 343/2 की भूमि को दोबारा विक्रय कर दिया। आवेदन में 25 से अधिक ऐसे खसरों व विक्रय नामावलियों की विस्तृत सूची संलग्न की गई है, जिन्हें अवैध रूप से टुकड़ों में बेचा गया है।

​कलेक्टर से की गई निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग

आवेदिका ने प्रशासन को 48 पृष्ठों के सहायक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुये अवैध प्लाटिंग के इस पूरे खेल में शामिल विक्रेताओं और खरीदारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

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