घायल चौसिंगा को मिला नया जीवन : फॉरेस्ट रेंजर की तत्परता से सफल रेस्क्यू

इंदागांव बफर परिक्षेत्र के क्षेत्रपाल (आरएफओ) सुशील कुमार सागर के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने जंगली कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से…

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वन्यजीव संरक्षण की मिसाल

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का एक और सराहनीय उदाहरण सामने आया है। इंदागांव बफर परिक्षेत्र के क्षेत्रपाल (आरएफओ) सुशील कुमार सागर के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने जंगली कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल एक चौसिंगा (फोर-हॉर्न्ड एंटीलोप) का सफलतापूर्वक बचाव कर उसे सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया।

जानकारी के अनुसार, धुरवागुड़ी के समीप घायल चौसिंगा दिखाई देने की सूचना गरियाबंद पुलिस के एक उपनिरीक्षक ने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही आरएफओ सुशील कुमार सागर ने तत्काल रेस्क्यू टीम को सक्रिय किया। मौके पर पहुंची टीम ने घायल वन्यजीव को सुरक्षित बाहर निकालकर वन विभाग के पशु चिकित्सकों की देखरेख में प्राथमिक उपचार कराया,
दिनभर उपचार और निगरानी के बाद शाम को चौसिंगा को उत्तर उदंती परिक्षेत्र स्थित चीतल सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर में स्थानांतरित किया गया। यहां पहले से दो अन्य चौसिंगा भी सुरक्षित रखे गये हैं, जिन्हें पूर्व में जंगल की आग के दौरान बचाया गया था।

यह सफल अभियान आरएफओ सुशील कुमार सागर और उनकी टीम की वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को एक बार फिर प्रमाणित करता है। इससे पहले भी उनकी टीम ने कई महत्वपूर्ण रेस्क्यू अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

इसी वर्ष इंदागांव स्थित सीआरपीएफ कैंप की कांटेदार कॉन्सर्टिना फेंसिंग में फंसी भारतीय उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) को सुरक्षित निकालकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था।

वहीं, महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से लगभग 400 किलोमीटर की उड़ान भरकर उदंती क्षेत्र पहुंचे संकटग्रस्त व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (सफेद पीठ वाला गिद्ध) का भी जीपीएस ट्रांसमीटर की सहायता से पता लगाकर सफल रेस्क्यू किया गया था। उपचार के लिये उसे जंगल सफारी, नया रायपुर भेजा गया था। इस अभियान ने राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान बनाई थी।

वन अधिकारियों के अनुसार, लगातार सफल हो रहे ये रेस्क्यू अभियान वन अमले, पशु चिकित्सकों और स्थानीय समुदाय के बेहतर समन्वय का परिणाम हैं। बीते वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने त्वरित प्रतिक्रिया दल, आधुनिक तकनीक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाया है।

घायल चौसिंगा का यह सफल रेस्क्यू इस बात का प्रमाण है कि संकट की हर घड़ी में वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वन विभाग पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है।


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