बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिये न्यायाधीशों ने संभाली कमान : स्कूलों में लग रहे विशेष जागरूकता शिविर

अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा एवं संरक्षण—हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसके अंतर्गत ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’,..

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 गरियाबंद में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत बच्चों को गुड टच-बैड टच, बाल विवाह, पॉक्सो कानून और साइबर अपराध से बचाव की दी जा रही जानकारी

 

गरियाबंद। बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से माननीय नालसा के निर्देशन में तालुका विधिक सेवा समिति गरियाबंद द्वारा ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत जिले के विभिन्न स्कूलों में विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा के उपायों और बाल अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। इन शिविरों में जिला एवं अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीशगण स्वयं स्कूलों में पहुंचकर बच्चों से संवाद कर रहे हैं।

अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा एवं संरक्षण—हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसके अंतर्गत ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’, ‘बोलो, बताओ, बचाओ’, ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’, ‘सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’ और ‘जागरूक बचपन, सशक्त भारत’ जैसे संदेशों के माध्यम से बच्चों को जागरूक किया जा रहा है।

न्यायाधीशगण बच्चों को बता रहे सुरक्षा और कानून के अधिकार

तालुका विधिक सेवा समिति गरियाबंद के अध्यक्ष एवं जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री बी.आर.साहू, फास्ट ट्रैक पॉक्सो स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री खुशबू जैन द्वारा विभिन्न शासकीय,अर्धशासकीय एवं निजी स्कूलों में आयोजित शिविरों में बच्चों को महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियां दी जा रही हैं।

शिविरों में बच्चों को गुड टच-बैड टच की पहचान, किसी भी प्रकार के शोषण से बचाव,बालकों के संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधान, पॉक्सो अधिनियम तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इसके साथ ही वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए बच्चों को इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने,ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने तथा किसी भी असामान्य या अनुचित गतिविधि की स्थिति में उचित कदम उठाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

शिविरों को संबोधित करते हुए न्यायाधीशगण ने कहा कि एक सुंदर, सुरक्षित और संवेदनशील समाज की स्थापना के लिये बच्चों की सुरक्षा,गरिमा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना आवश्यक है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेषकर बाल्यावस्था की कोमल उम्र में बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को अपने साथ होने वाली किसी भी अनुचित घटना के संबंध में बिना भय के अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। परिवार, विद्यालय और समाज के सभी वर्गों के सक्रिय सहयोग से ही बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार किया जा सकता है।

विभिन्न विभागों के समन्वय से हो रहा शिविरों का संचालन

नालसा के निर्देशानुसार आयोजित इन शिविरों का संचालन न्यायाधीशगण, पैनल अधिवक्ताओं, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गठित सामाजिक कार्यकर्ताओं, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन इकाई, विशेष किशोर पुलिस इकाई तथा अधिकार मित्रों के सहयोग से किया जा रहा है। विभिन्न विभागों की सहभागिता से बच्चों को कानूनी सहायता, सुरक्षा तंत्र और आवश्यक सहयोग के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

इन स्कूलों में हो चुके हैं शिविर-

सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत अब तक द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल,प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल मालगांव, सरस्वती शिशु हायर सेकंडरी स्कूल गरियाबंद,संत सिया भुनेश्वरी शरण गुरुकुल कुटेना, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल गरियाबंद तथा स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल गरियाबंद में जागरूकता शिविर आयोजित किये जा चुके हैं।

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