अपने ही आदेश के उलट कदम ? नालंदा परिसर निर्माण प्रस्ताव पर रोक के बाद फिर तैयारी, कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल

पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय परिसर में प्रस्तावित 250 सीटर नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी) निर्माण को लेकर जिला प्रशासन एक बार फिर विवादों में है..

अपने ही आदेश के उलट कदम ? नालंदा परिसर निर्माण प्रस्ताव पर रोक के बाद फिर तैयारी, कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल

गरियाबंद पहुंची प्रभारी सचिव आर संगीता

गरियाबंद। पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय परिसर में प्रस्तावित 250 सीटर नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी) निर्माण को लेकर जिला प्रशासन एक बार फिर विवादों में है। केंद्र और राज्य स्तर से स्पष्ट रोक के बावजूद उसी स्थान पर निर्माण की तैयारी शुरू किये जाने से कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कलेक्टर केंद्र व राज्य शासन आदेश को महज रद्दी का कागज समझते है ?

अवगत हो कि 18 मार्च को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अवर सचिव विपिंदर चंदर चमोली ने राज्य शासन को पत्र जारी कर पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय परिसर में प्रस्तावित 250 सीटर नालंदा परिसर के निर्माण और इससे जुड़ी गतिविधियों में तत्काल रोक लगाने के निर्देश दियर थे। इसके बाद 23 मार्च को समग्र शिक्षा के आयुक्त ने कलेक्टर को पत्राचार कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश भेजे। निर्देशों के पालन में कलेक्टर ने स्वयं 27 मार्च को नगर पालिका को पत्र लिखकर निर्माण कार्य प्रस्ताव रोकने को कहा था। हालांकि अब स्थिति इसके उलट नजर आ रही है।

एक ही दिन में स्थिति पलटने की आपा – धापी

कार्यालय कलेक्टर द्वारा गरियाबंद नगर में नालंदा परिसर निर्माण के लिये समन्वय स्थापित करने के सम्बंध में एक ही दिन पूर्व 16 अप्रैल को डिप्टी कलेक्टर और एसडीएम को पत्र जारी कर 17 अप्रैल को नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष/ पार्षदों/ शाला विकास प्रबंधन समिति की बैठक आहूत करने निर्देशित किया गया है, इस बैठक में उसी स्थान पर निर्माण को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि जो अधिकारी पहले खुद निर्माण रोकने के आदेश जारी कर चुके हैं, वही अब उसे पुनः शुरू करने की दिशा में कदम क्यों बढ़ा रहे हैं।

करीब 4 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत के बाद केंद्र और राज्य स्तर पर रोक लगाई गई थी। जिले की प्रभारी सचिव आर.संगीता द्वारा भी इस पर स्पष्ट रोक के निर्देश दिये गये थे। इसके बावजूद जिला स्तर पर इस तरह की गतिविधि से सरकारी तंत्र में सवाल उठने लगे है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि क्या उच्च स्तर से नई अनुमति ली गई है या नहीं।

सूत्रों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी राज्य शासन को नहीं दी गई है। कलेक्टर केंद्र और राज्य सरकार के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे है। ऐसे में यह मामला केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उच्चस्तरीय निर्देशों की अनदेखी के रूप में भी देखा जा रहा है। पहले से ही शाला विकास एवं प्रबंधन समिति द्वारा इस निर्माण का विरोध किया जाता रहा है। अब रोक के बाद भी फिर से उसी स्थान पर निर्माण की तैयारी से विवाद और गहराने की संभावना है। शाला विकास प्रबंधन समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में फिर से पीएमओ और राज्य के शिक्षा विभाग को शिकायत की जायेगी। इसके साथ ही मामले को अब हाईकोर्ट भी ले जाया जायेगा।

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