गरियाबंद / देवभोग। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद एवं पर्यावरणविद सोनम वांगचुक द्वारा विभिन्न शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर किये जा रहे अनशन के समर्थन में अब गरियाबंद जिले के अंतिम छोर स्थित देवभोग विकासखंड से भी आवाज उठी है।
सोनम वांगचुक के समर्थन में देवभोग के तीन सामाजिक संगठनों के युवा प्रकोष्ठों के ब्लॉक अध्यक्ष टेकलाल प्रधान,भोले मांझी और हुकमत यादव ने एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल कर अपना समर्थन व्यक्त किया है।
युवाओं का कहना है कि नीट पेपर लीक सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं की निष्पक्ष एवं सघन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिये। उन्होंने महंगी होती शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुये आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
“चुप रहना अब संभव नहीं”
अनुसूचित जाति युवा प्रकोष्ठ के देवभोग ब्लॉक अध्यक्ष टेकलाल प्रधान ने कहा कि अब चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक देशहित में किये गये अपने कार्यों और उपलब्धियों के लिये जाने जाते हैं। उनका अनशन उन विद्यार्थियों के भविष्य की चिंता को लेकर है, जो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर संवाद स्थापित करना चाहिये। उन्होंने कहा, “मैं भी देश का युवा हूं और देश के बेहतर भविष्य की कामना करता हूं। इसलिये इस मंच के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख रहा हूं।”
आदिवासी समाज युवा प्रकोष्ठ के ब्लॉक अध्यक्ष भोले मांझी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी नागरिक की बात सुनने के लिये इतना लंबा इंतजार नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने देश के लिये उल्लेखनीय योगदान दिया है, उन्हें अपनी बात रखने के लिये अपना स्वास्थ्य और जीवन दांव पर लगाना पड़ रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
पिछड़ा वर्ग यादव समाज देवभोग के युवा पदाधिकारी हुकमत यादव ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, छात्रों के भविष्य की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये। उन्होंने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य एवं जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
भूख हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे देवभोग के वरिष्ठ नागरिक फिरोज खान ने कहा कि नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्र सरकार को ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने चाहिये।
इस एक दिवसीय भूख हड़ताल को आदिवासी युवा प्रकोष्ठ के संरक्षक पुलस्त नेताम तथा लोकेश सोनवानी और सूरज प्रधान ने भी अपना व्यक्तिगत समर्थन दिया है।







