छुरा ब्लॉक के ग्राम परसापानी की 52 महिलाओं ने मांगा वन अधिकार पट्टा : पात्रता के बावजूद परेशान किये जाने के आरोप

ग्रामीण महिलाओं के अनुसार उन्होंने वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दावा प्रपत्र जमा किया था। वर्ष 2023 में परसापानी वन अधिकार समिति ने..

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गरियाबंद। जिले के वनांचल क्षेत्र छुरा ब्लॉक के ग्राम परसापानी की ग्रामीण महिलाओं ने वन अधिकार पट्टे की मांग को लेकर जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। महिलाओं का आरोप है कि वन्य अधिकारों की मान्यता अधिनियम के तहत पात्र होने के बावजूद उनके पात्रता दावों को ग्राम पंचायत स्तर पर मनमाने तरीके से निरस्त कर दिया गया है।

महिलाओं ने जिला कलेक्टर व सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और वन अधिकार पट्टा प्रदान करने की मांग की है।

ग्रामीण महिलाओं के अनुसार उन्होंने वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दावा प्रपत्र जमा किया था। वर्ष 2023 में परसापानी वन अधिकार समिति ने उन्हें पात्र मानते हुये प्रस्ताव पारित किया था। इतना ही नहीं, संबंधित भूमि का नक्शा और खसरा भी उपलब्ध कराया गया था।

महिलाओं का कहना है कि इसके बाद 17 जून 2025 को आयोजित ग्रामसभा में भी उनके पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद बाद में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा यह कहते हुये उनका दावा खारिज कर दिया गया कि वे 13 दिसंबर 2005 से पूर्व भूमि पर काबिज नहीं थीं। महिलाओं का आरोप है कि बिना उचित जांच और बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।

ग्रामीण महिलाओं ने आवेदन में पटवारी, ग्राम पटेल और पंचायत सचिव पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे कई पीढ़ियों से उक्त भूमि पर खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में उनके अधिकारों को दबाया जा रहा है और वन अधिकार पट्टा नहीं दिया जा रहा है।

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर सूचना दी जाती तो वे अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत कर सकती थीं।

वहीं महिलाओं का कहना है की हम वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। ग्रामसभा और वन अधिकार समिति ने हमें पात्र माना था, लेकिन बाद में बिना किसी सूचना के हमारे दावे खारिज कर दिए गये। हम जिला प्रशासन से न्याय और वन अधिकार पट्टा देने की मांग करते हैं।”

इस मामले में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग लोकेश पटेल ने कहा कि चूंकि प्रकरण सब डिवीजन से रिजेक्ट होकर आया है, इसीलिये अब संबंधित विभागों को दुबारा जांच के लिये पत्र प्रेषित किया जायेगा।

ग्राम पंचायत केंवटीझर सचिव देवेंद्र ठाकुर के अनुसार इनमें से अधिकांश महिलाओं का कब्जा घास भूमि पर है, और कुछ लोगों का नियमानुसार कब्जा नही पाया गया है।

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