स्वास्थ्य सेवाओं में निजी अस्पतालों की मनमानी : पक्षपाती प्रशासनिक कार्यवाही से मामला गंभीर

आरोप है कि अस्पताल में मरीजों के वास्तविक उपचार और दस्तावेजों में दर्ज विवरण में अंतर रखकर आयुष्मान कार्ड के माध्यम से अधिक राशि का दावा..

Oplus_16908288

चंद लोगों के लिये कुछ रास्ते ढाले गये,
खास खेतों तक सभी दरिया, सभी नाले गये।
क्या सियासत है कि अभिनंदन हुआ घड़ियाल का,
जाल केवल मछलियों के वास्ते डाले गये।”

किरीट ठक्कर, गरियाबंद। जिले में पिछले कुछ दिनों से निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपचार के दौरान मरीजों की मौत और कथित अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था चर्चा में है। ताजा मामला छुरा स्थित श्री संकल्प छत्तीसगढ़ मिशन हॉस्पिटल से जुड़ा है, जहां आयुष्मान योजना के तहत अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।

आरोप है कि अस्पताल में मरीजों के वास्तविक उपचार और दस्तावेजों में दर्ज विवरण में अंतर रखकर आयुष्मान कार्ड के माध्यम से अधिक राशि का दावा किया जा रहा है। सामान्य बीमारी या मामूली चोट वाले मरीजों को दस्तावेजों में गंभीर श्रेणी में दर्शाने तथा जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाकर क्लेम बढ़ाने की शिकायतें सामने आई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में उक्त अस्पताल में उपचार के दौरान 5 से 6 मरीजों की मृत्यु के मामले भी सामने आये हैं। इनमें टेंगनाबासा निवासी हेमंत सिन्हा, ग्राम दुल्ला के तुलेश्वर पटेल, लोहझर की एक महिला तथा खुसुरुपाली निवासी गोकुल ठाकुर के नाम प्रमुख रूप से बताये जा रहे हैं।

बता दें कि पिछले कई दिनों से इस अस्पताल में इलाज में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सार्वजनिक हो रही हैं, बावजूद इसके अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, इसी तरह की शिकायतों के आधार पर छुरा क्षेत्र के एक अन्य निजी अस्पताल तथा जिला मुख्यालय स्थित एक अस्पताल पर निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यवाही की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारों का कहना है कि जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक पंजीयन वाले संस्थानों में एलोपैथिक उपचार, अनावश्यक जांच के नाम पर मरीजों को लैब/ डाइग्नोसिस सेंटरों में भेजने तथा जांच दल के सदस्यों की निष्पक्षता जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं जांच से जुड़े कुछ लोग निजी संस्थानों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े तो नहीं हैं।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा ताजा मामले में जांच कार्यवाही की जानकारी मिल रही है। संबंधित अस्पताल के रिकॉर्ड, बिलिंग प्रक्रिया और आयुष्मान योजना के तहत किये गये क्लेम की पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्य खबरें

You cannot copy content of this page