विवादित स्थल पर सेंट्रल लाइब्रेरी का भूमि पूजन सवालों के घेरे में ?

जिला मुख्यालय स्थित पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय परिसर में प्रस्तावित सेंट्रल लाइब्रेरी निर्माण को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पीएम श्री आत्मानंद स्कूल परिसर के जिस स्थल पर…

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गरियाबंद। जिला मुख्यालय स्थित पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय परिसर में प्रस्तावित सेंट्रल लाइब्रेरी निर्माण को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पीएम श्री आत्मानंद स्कूल परिसर के जिस स्थल पर निर्माण कार्य को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत के बाद केंद्र और राज्य स्तर से रोक लगाई गई थी, उसी विवादित भूमि पर शनिवार को उपमुख्यमंत्री अरुण साव के हाथों भूमिपूजन प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासनिक निर्णय और सरकारी आदेशों की अनदेखी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नालंदा परिसर की तर्ज पर करीब 4.33 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 250 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी के लिये जिला प्रशासन ने स्कूल परिसर के भीतर करीब एक एकड़ से अधिक भूमि चिन्हित की थी। प्रस्तावित स्थल राजस्व रिकॉर्ड में आबादी मद की भूमि है, लेकिन बीते करीब 40 वर्षों से यह स्कूल की बाउंड्री वॉल के भीतर खेल मैदान के रूप में उपयोग में है। यहां स्कूल और क्रीड़ा परिसर के विद्यार्थी नियमित खेल गतिविधियां संचालित करते रहे हैं।

मामले में शाला विकास एवं प्रबंधन समिति ने बिना समिति की सहमति निर्माण प्रक्रिया शुरू किये जाने की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की थी। शिकायत के बाद भारत सरकार के अवर सचिव विपिंदर चंद्र चमोली ने 18 मार्च को राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर को पत्र जारी कर मामले की जांच और निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिये थे।
इसके बाद राज्य परियोजना कार्यालय से समग्र शिक्षा आयुक्त ने कलेक्टर एवं मिशन संचालक समग्र शिक्षा गरियाबंद को भी निर्माण रोकने निर्देशित किया था।

महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक इस रोक को हटाने संबंधी कोई नया आदेश जारी नहीं हुआ है। इसके बावजूद नगरीय प्रशासन विभाग के माध्यम से उपमुख्यमंत्री का भूमिपूजन कार्यक्रम इसी स्थल पर तय किया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार उपमुख्यमंत्री 3 मई को शाम 4 बजे गरियाबंद पहुंचेंगे और इसके बाद प्रस्तावित लाइब्रेरी का भूमिपूजन करेंगे।

निर्माण को लेकर स्कूल प्रबंधन, अभिभावक, खिलाड़ी और क्रीड़ा परिसर प्रशासन ने भी विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि खेल मैदान में निर्माण से विद्यार्थियों की खेल गतिविधियां प्रभावित होंगी और भविष्य में खेल प्रतिभाओं के लिये संकट खड़ा होगा।

जानकारी के मुताबिक क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू भी इसी विवादित स्थल पर निर्माण कराने के पक्ष में सक्रिय हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि कलेक्टर ने स्वीकार किया है कि निर्माण पर रोक लगी हुई है और इस संबंध में अभी सहमति नहीं बन सकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र और राज्य स्तर से निर्माण पर रोक बरकरार है, तो उसी भूमि पर भूमिपूजन किस आधार पर किया जा रहा है। क्या जिला प्रशासन के द्वारा उप मुख्यमंत्री को गुमराह किया जा रहा है ?

सहमति नहीं बनी, फिर भी तय हुआ भूमिपूजन

करीब एक सप्ताह पहले विवाद सुलझाने और सहमति बनाने के लिये एसडीएम की मौजूदगी में शाला विकास एवं प्रबंधन समिति, स्कूल स्टाफ और नगर पालिका की टीम की बैठक हुई थी। बैठक में निर्माण को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि कलेक्टर से भी मिले, लेकिन वहां भी कलेक्टर ने निर्माण को लेकर सहमति नहीं दी। इसके बावजूद आरोप है कि विधायक और नगर पालिका की टीम ने विवाद और रोक की वास्तविक स्थिति बताये बिना उपमुख्यमंत्री को भूमिपूजन के लिये राजी कर लिया।

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