रायपुर / गरियाबंद। मई 2025 में जिले के राजिम क्षेत्र में ईलाज के नाम पर चमत्कार,धर्मांतरण और मानसिक बीमार युवती को जबरिया बंधक बनाये रखने का मामला सामने आया था।
सिर्फ इतना ही नही बल्कि ईलाज के नाम पर मानसिक रूप से बीमार 18 वर्षीय एक युवती के साथ अत्याचार की हद पार की गई थी, जिससे हुई मौत के बाद अंधविश्वास अज्ञानता गरीबी और दबाव का पूरा दर्द भरा किस्सा उजागर हुआ था।
आपको बता दें कि राजिम के नजदीक गरियाबंद जिले के ग्राम सुरसाबांधा में एक महिला द्वारा इलाज की आड़ में धर्मांतरण का खेल चलाया जा रहा था। उक्त महिला ईश्वरी साहू बाइबिल पाठ और प्रभु की प्रार्थना के जरिये चमत्कार और रोग-मुक्ति का दावा करती रही थी, कुछ स्थानीय महिलाओं ने उस समय बताया था कि अक्सर यहां “चंगाई सभा, का भी आयोजन किया जाता था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मानसिक बीमार युवती योगिता का ईलाज पहले रायपुर और फिर महासमुंद में चल रहा था, अज्ञानता, अभाव और किसी भी तरह पुत्री का ईलाज कराने की मंशा लिये योगिता सोनवानी की मां सुनीता, सुरसाबांधा की महिला ईश्वरी साहू के संपर्क में आ गई।
ईश्वरी ने ईलाज के बहाने योगिता को अपने घर में रख लिया और उसके बाद ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाने लगी। इलाज के नाम पर मानसिक बीमार युवती पर अत्याचार का सिलसिला बढ़ता गया, शैतान भगाने के नाम उसके शरीर पर गर्म पानी और तेल डाला जाता था,आरोपी महिला ईश्वरी साहू, युवती के शरीर को अपने पैरों से मसलती रही।
स्वास्थ्य में सुधार के बजाये योगिता की हालत दिन ब दिन बिगड़ती गयी। प्रार्थिया सुनीता उसे वापस ले जाने की बात करती तो उसे शैतान का डर दिखाया जाता था।
अंततः एक दिन उपचार के नाम पर पैरों से मसलते योगिता की पसली की हड्डी टूटने और भारी दबाव की वजह से उसकी मौत हो गई। पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि महिला ने इलाज के नाम पर 3 महीने तक बंधक बनाकर रखा और शैतान का डर दिखाकर शारीरिक यातनायें दी और कई तरह से प्रताड़ित करती रही। बेहद खराब हालात के बावजूद युवती को अस्पताल नही ले जाया गया और अंततः उसकी मौत हो गई।
युवती की मौत के बाद राजिम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। युवती की मां प्रार्थिया की रिपोर्ट पर प्रथम दृष्टया अपराध धारा छ.ग.धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2006 की धारा 4 व औषधि और चमत्कारीक उपचार अधिनियम 1954 की धारा 7 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। जिसके बाद ईलाज के नाम पर बंधक और धर्मांतरण का दबाव बनाने के आरोप में ईश्वरी साहू को गिरफ्तार किया गया था।
उपचार के दौरान पीड़िता की मौत होने पर थाने में मर्ग कायम कर शार्ट पीएम रिपोर्ट प्राप्त की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पसली टूटने और अत्यधिक दबाव की वजह से मृत्यु होना पाया गया। जिसके बाद एफआईआर में बीएनएस की धारा 105 जोड़ी गई। गंभीर धाराओं में मामला पंजीबद्ध करने के बाद सुरसाबाँधा निवासी महिला को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजा गया था।
अब मिली आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में 01 मई 2026 को रायपुर की विशेष अदालत (SC/ST कोर्ट) ने आरोपी महिला ईश्वरी साहू को दोषी करार देते हुये आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कोर्ट ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, टोनही प्रताड़ना अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट के तहत भी सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह सजा छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत की गई कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके तहत दोषी पर हत्या के साथ-साथ जबरन धर्म परिवर्तन के भी आरोप सिद्ध हुये। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पारित किया है, जो जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल की जेल और महिला/नाबालिक से जुड़े मामलों में 10-20 साल या उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान करता है।







