बीजेपी छत्तीसगढ़ की X हैंडल में गरियाबंद जिले की धर्मांतरण की घटना को पोस्ट किया गया है। जारी की गई पोस्ट के अनुसार माननीय मुख्यमंत्री श्री @vishnudsai जी के नेतृत्व में धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत पहली सजा ने साफ संदेश दे दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब जबरन धर्मांतरण और ऐसे कृत्यों पर जीरो टॉलरेंस है, और आगे भी हर दोषी पर लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
आपको बता दें कि मई 2025 में गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में ईलाज के नाम पर चमत्कार,धर्मांतरण और मानसिक बीमार युवती को जबरिया बंधक बनाये रखने का मामला सामने आया था। ईलाज के नाम पर युवती के साथ की गई लगातार प्रताड़ना की वजह से युवती की मौत हो गई थी।
इस मामले में 01 मई 2026 को रायपुर की विशेष अदालत (SC/ST कोर्ट) ने आरोपी महिला ईश्वरी साहू को दोषी करार देते हुये आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कोर्ट ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, टोनही प्रताड़ना अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट के तहत भी सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह सजा छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत की गई कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके तहत दोषी पर हत्या के साथ-साथ जबरन धर्म परिवर्तन के भी आरोप सिद्ध हुये। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पारित किया है, जो जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल की जेल और महिला/नाबालिक से जुड़े मामलों में 10-20 साल या उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान करता है।







