गरियाबंद में एन.डी.पी.एस.,एस.सी./एस.टी.एवं विद्युत (इलेक्ट्रिसिटी) न्यायालय स्थापना की मांग

गरियाबंद जिले में जिला न्यायालय एवं जब तक ज़िला न्यायालय गरियाबंद की स्थापना नहीं हो जाती तब तक ..

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गरियाबंद। अधिवक्ता संघ गरियाबंद के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधिमंडल ने आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा से सौजन्य भेंट कर गरियाबंद जिले में जिला न्यायालय एवं जब तक ज़िला न्यायालय गरियाबंद की स्थापना नहीं हो जाती तब तक यथाशीघ्र एन.डी.पी.एस.,एस.सी./एस.टी.एवं विद्युत (इलेक्ट्रिसिटी) न्यायालय की स्थापना की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को अवगत कराया कि वर्ष 2011-12 में जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना के बाद भी गरियाबंद जिले में इन विशेष न्यायालयों का अभाव है, जिसके कारण जिले के नागरिकों को विभिन्न मामलों की सुनवाई के लिये रायपुर जाना पड़ता है। इससे गरीब, महिला, बुजुर्ग एवं दूरस्थ क्षेत्रों के पक्षकारों को आर्थिक, मानसिक एवं समय संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि ओडिशा सीमा से लगे होने तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य जिला होने के कारण एन.डी.पी.एस.एवं एस.सी./एस.टी. अधिनियम से संबंधित मामलों की संख्या अधिक है। इन मामलों की सुनवाई रायपुर में होने से न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब हो रहा है। गरियाबंद में आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध होने के कारण इन न्यायालयों की स्थापना से आम जनता को सस्ता, सुलभ एवं त्वरित न्याय मिल सकेगा।

इस पर माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन दिया तथा कहा कि इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रतिनिधिमंडल इस मांग को राज्य शासन के समक्ष भी प्रमुखता से प्रस्तुत करे, ताकि आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

इस अवसर पर अधिवक्ता संघ गरियाबंद की ओर से अध्यक्ष नरेंद्र देवांगन,उपाध्यक्ष प्रशांत मानिकपुरी,अधिवक्ता मुर्तज़ा ख़ान,अधिवक्ता लोकनाथ साहू, पूर्व शासकीय अधिवक्ता झनक राम साहू उपस्थित रहे।

अधिवक्ता संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि गरियाबंद में जिला न्यायालय एवं विशेष न्यायालयों की स्थापना से जिले के नागरिकों को न्याय सुलभ होगा तथा न्यायिक व्यवस्था और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।

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