गरियाबंद। नगर पालिका परिषद गरियाबंद क्षेत्र में कथित अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनी के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस मामले में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पर गंभीर आरोप लगाते हुये उनके विरुद्ध कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अवैध कॉलोनी के संबंध में तथ्यात्मक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट तैयार कर उच्च कार्यालयों को भेजी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित क्षेत्र में कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग किये जाने तथा कॉलोनाइजर एक्ट के प्रावधानों की अनदेखी के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अवैध कॉलोनी के विकास की स्थिति को लेकर भी भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई और कॉलोनी को करीब 75 प्रतिशत विकसित बताकर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई।
शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर मामला बताते हुये आरोप लगाया है कि नगर पालिका अधिकारी द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुये वास्तविक तथ्यों के विपरीत मनगढ़ंत एवं झूठी रिपोर्ट भेजी गई। मामले में अवैध कॉलोनी से जुड़े लोगों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने और प्रशासन को गुमराह करने की भी आशंका जताई गई है।
शिकायत पत्र में मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाये और यदि जांच में आरोप सही पाये जाते हैं तो संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के साथ ही कठोर विभागीय कार्रवाई की जाये।
शिकायतकर्ता जुनैद खान, वार्ड क्रमांक 15, गरियाबंद द्वारा प्रस्तुत शिकायत के साथ कई दस्तावेज भी संलग्न किये गये हैं। इनमें नगर पालिका परिषद गरियाबंद से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी, तहसीलदार कार्यालय से संबंधित दस्तावेज, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त जानकारी, कलेक्टर कार्यालय गरियाबंद के पत्र दिनांक 23 फरवरी 2026 तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, रायपुर से संबंधित दस्तावेज शामिल बताये गये हैं।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की गहन और स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
आपको बता दें कि ये पूरा मामला नगर पालिका परिषद गरियाबंद के वार्ड क्रमांक 15 स्थित होटल सिटी रिजेंसी के समीप विकसित कथित अवैध कॉलोनी का है। इस कालोनी को लेकर नगर पालिका परिषद गरियाबंद के आधिकारिक पत्राचार ने गंभीर प्रशासनिक विरोधाभास उजागर किया है।
नगर पालिका ने पहले इसी कॉलोनी को अवैध बताते हुये लगभग ₹71.65 लाख के सीसी रोड, आरसीसी ड्रेन एवं आरसीसी कलवर्ट निर्माण कार्य निरस्त कर दिये थे,किन्तु मात्र 17 दिन बाद उसी क्षेत्र के लिये नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से मार्ग संरचना अनुमोदन का प्रस्ताव भेज दिया गया।
सबसे बड़ा प्रश्न ये उठता है कि जिस क्षेत्र को नगर पालिका स्वयं अवैध कॉलोनी मानते हुये करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के निर्माण कार्य निरस्त कर चुकी थी, उसी क्षेत्र के लिये कुछ ही दिनों बाद मार्ग संरचना अनुमोदन किस आधार पर मांगा गया ?
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