गरियाबंद। जिले में कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। हर पखवाड़े या महीने में होने वाली इन पत्रकार वार्ताओं को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कब तक पत्रकारों के कंधे पर बंदूक रखकर केवल राजनीतिक बयानबाजी की जायेगी ? जनहित के मुद्दों पर सड़क की लड़ाई आखिर कब लड़ी जाएगी ? रेस्ट हाउस की बैठकों से स्थानीय जनता की समस्याओं का कितना समाधान निकल पायेगा, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
ये सवाल ऐसे समय में उठ रहे हैं, जब जिले की जनता विभिन्न स्थानीय समस्याओं से जूझ रही है और समाधान की उम्मीद विपक्ष से कर रही है। छत्तीसगढ़ सहित जिले में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है। ऐसे में जनता के हितों की रक्षा करना और जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करना विपक्ष का प्रथम दायित्व माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर रसोई गैस की समस्या इन दिनों बेहद गंभीर बनी हुई है। सरकार ने गैस को आवश्यक सेवा की श्रेणी में रखा है, इसके बावजूद कालाबाजारी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। एक ओर आम लोग ऑनलाइन बुकिंग के बाद कई दिनों तक इंतजार कर रहे हैं और वितरण केंद्रों पर लंबी कतारों में परेशान हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब दो हजार रुपये तक में गैस सिलेंडर ब्लैक में आसानी से उपलब्ध होने की बातें कही जा रही हैं। महंगाई के अपने तेवर है, नकली खाद्य पदार्थों और नकली एफएमसीजी प्रोडक्ट छत्तीसगढ़ के बाजार में खपाये जाने की जानकारियां सामने आ रही है।
इसी तरह जिले में आयोजित सुशासन समाधान शिविरों को लेकर भी कांग्रेस की भूमिका अपेक्षाकृत कमजोर नजर आई है। जिला स्तर के नेताओं ने औपचारिक विरोध दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जबकि कई मामलों में ईन समाधान शिविरों में सत्ताधारी दल भाजपा के स्थानीय नेता जनता के बीच अधिक सक्रिय दिखाई दिये है।
गुरुवार को भी जिला मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य फोकस स्थानीय मुद्दों के बजाय केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना पर रहा।
यदि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के सीमित एवं संयमित उपयोग की अपील की है, तो इसे सामान्य जनहित संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है। इस तरह की अपीलें समय-समय पर विभिन्न सरकारों और जनप्रतिनिधियों द्वारा की जाती रही हैं। ऐसे में केवल राजनीतिक विरोध के दृष्टिकोण से इसे देखने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस पत्रकार वार्ता में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू भी मौजूद थे। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन ऊर्जा बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग जैसी बातों को व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिये। वहीं, जनता की अपेक्षा अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय और प्रभावी संघर्ष की है।







