जिला पंचायत के आदेश से मैनपुर में गजभिये को सीईओ का प्रभार, नियुक्ति पर उठे सवाल

जितेश कुमार गजभिए के पास पहले से जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) का महत्वपूर्ण प्रभार है, जिसमें पूर्व में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं..

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गरियाबंद। जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के बाद मैनपुर जनपद पंचायत में सीईओ की नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ रहा है। 6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत प्रशासनिक व्यवस्था के दृष्टिकोण से जिला पंचायत में पदस्थ प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी जितेश कुमार गजभिए को जनपद पंचायत मैनपुर का प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करते हुए उन्हें वित्तीय एवं प्रशासनिक संपूर्ण प्रभार आगामी आदेश तक सौंप दिया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी और कलेक्टर के अनुमोदन के बाद जारी की गई है।

यह नियुक्ति मैनपुर जनपद पंचायत के सीईओ डीएस नागवंशी के 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने के बाद की गई है, जिसके चलते यह पद रिक्त चल रहा था। हालांकि, आदेश जारी होते ही इस निर्णय को लेकर विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं।

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताते हुये कहा है कि मैनपुर में पहले से पदस्थ अतिरिक्त सीईओ डीके शांडिल्य इस पद के वास्तविक दावेदार थे और उनका कार्यकाल भी संतोषजनक रहा है। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज कर दूसरे अधिकारी को पूर्ण प्रभार देना प्रशासनिक निर्णय पर सवाल खड़े करता है।

नेताम ने यह भी आरोप लगाया कि जितेश कुमार गजभिए के पास पहले से जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) का महत्वपूर्ण प्रभार है, जिसमें पूर्व में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें एक और अहम जिम्मेदारी सौंपना संदेह को और गहरा करता है।

उल्लेखनीय है कि डीएमएफ के माध्यम से पिछले कई वर्षों से जिले में करोड़ों रुपये के विकास कार्य संचालित हो रहे हैं और इसकी जिम्मेदारी वर्तमान में गजभिए के पास ही है। ऐसे में एक ही अधिकारी को कई महत्वपूर्ण दायित्व दिये जाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

जिला पंचायत कार्यालय से जारी आदेश की प्रतिलिपि विभिन्न विभागों और अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है, जिसमें मैनपुर जनपद पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं। फिलहाल इस नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

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