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अर्नब तूफान से धान की फसल को भारी नुकसान, धान बिक्री के बाद राशि समायोजित करने का दिया सुझाव
गरियाबंद। प्रदेश में अर्नब तूफान के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी अर्ली किस्म की धान बारिश की भेंट चढ़ गई है, वहीं सरना किस्म की धान में बालियां निकलने के दौरान तेज हवाओं से पौधे जमीन पर गिर गये हैं। ऐसे में किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती के साथ दीपावली का त्योहार मनाने के लिए आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए पिछड़ा वर्ग महासभा के बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा प्रभारी एवं किसान नेता जीवन लाल साहू ने राज्य सरकार से मांग की है कि दीपावली के पूर्व प्रत्येक किसान के बैंक खाते में कम से कम 20 हजार रुपये की अग्रिम आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाये, ताकि किसान परिवार भी त्योहार की खुशियां मना सकें।
जीवन साहू ने कहा कि एक ओर पूरा देश दीपावली की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर असमय बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अर्ली किस्म की धान पककर तैयार थी, लेकिन बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं सरना किस्म की धान में अभी बालियां निकलने की स्थिति है। तेज हवा के चलते धान के पौधे खेतों में गिर गये हैं। खेतों में पानी भरे होने और पौधों के जमीन पर गिरने से दानों में समुचित भराव नहीं होने तथा पूरी फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि किसानों ने इस बार अच्छी फसल की उम्मीद में अपने बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां मनाने के सपने संजोये थे। धान बेचकर मिठाई, पटाखे और नए कपड़े खरीदने की तैयारी थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने किसानों की आर्थिक स्थिति को संकट में डाल दिया है।
अब उनके सामने यह सवाल है कि जब फसल ही बर्बाद हो रही है तो परिवार के साथ त्योहार कैसे मनाये ?
जीवन साहू ने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुये कहा कि जब सरकार अपने कर्मचारियों को त्योहार के अवसर पर अग्रिम वेतन देने की व्यवस्था कर सकती है, तो अन्नदाता किसानों के लिये भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती?
उन्होंने मांग की कि दीपावली के पहले प्रत्येक किसान के निजी बैंक खाते में कम से कम 20 हजार रुपये की अग्रिम राशि सीधे हस्तांतरित की जाये।
उन्होंने इसके लिये एक व्यावहारिक सुझाव भी दिया है। उनके अनुसार, किसानों को दी जाने वाली इस राशि को धान खरीदी के बाद मिलने वाले भुगतान से समायोजित किया जा सकता है। इससे सरकार पर स्थायी अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा और किसानों को तत्काल आर्थिक राहत मिल सकेगी।
साहू ने कहा कि किसानों के हाथों में समय पर पैसा पहुंचेगा तो वे अपने परिवार के साथ दीपावली मना सकेंगे। साथ ही बाजार में भी खरीदारी बढ़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसानों की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस मांग पर दीपावली से पहले संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाये।
