जांजगीर-चांपा। परिवहन विभाग की लापरवाही का अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसमें चांपा निवासी अजय पाटले की घर में खड़ी बाइक का चालान सड़क पर चलते वाहन के रूप में काट दिया गया। पीड़ित को 22 नवंबर को मोबाइल पर सूचना मिली कि उनके वाहन को मोपका–सेन्द्रि बायपास मार्ग पर पाया गया, जिसके आधार पर इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाणपत्र के अभाव में 2300 रुपये का ई-चालान जारी किया गया है।
पीड़ित अजय पाटले का कहना है कि उनका वाहन कई दिनों से घर पर ही खड़ा था। इसके बाद उन्होंने परिवहन विभाग, बिलासपुर को पत्र लिखकर उस दिन की फोटोग्राफी और वीडियो फुटेज उपलब्ध कराने तथा चालान को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार की गलत चालानी कार्रवाई कोई पहली घटना नहीं है। कई लोगों के साथ ऐसे फर्जी चालान कटने के मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर आमजन नाराज हैं और विभाग से बिना ठोस प्रमाण, फोटो और जांच के चालान न काटने की मांग कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग ने चालानी प्रक्रिया एक निजी कंपनी को आउटसोर्स कर रखी है, जिसे हर चालान पर अच्छा-खासा कमीशन मिलता है। यही कारण है कि मामूली त्रुटि पर भी तुरंत चालान काट दिया जाता है, जिससे वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर दुर्घटनाओं के वास्तविक कारण — खस्ताहाल सड़कें, सड़कों पर बैठने वाले आवारा पशु, जगह-जगह अव्यवस्थित पार्किंग, को विभाग नज़रअंदाज़ करता दिखाई देता है।
वाहन मालिकों का कहना है कि वे वाहन खरीद, लाइसेंस शुल्क, फिटनेस, पॉल्यूशन, रोड टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर भारी जीएसटी चुकाने के बाद भी सुविधाओं से वंचित हैं। कई कस्बों में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है,और जहां है भी, वहां मनमाना शुल्क और बदतर व्यवहार किया जाता है।
बिलासपुर में ढेंका से अंदर आते ही सड़क बदहाल है तथा लालखदान तक सड़क चौड़ीकरण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जनता का सवाल है कि जब सड़कें, सुरक्षा और सुविधायें प्राथमिकता होनी चाहिये, तब विभागीय लाभ और चालान वसूली को बढ़ावा देना कितना उचित है ? शासन-प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।







