गरियाबंद में कब खत्म होगा शिक्षकों का संलग्नीकरण ?

संचालनालय के आदेश के बाद प्रदेश के कई जिलों में कार्रवाई शुरू हो गई है। इसका उदाहरण बलौदाबाजार-भाटापारा जिला है, जहां जिला शिक्षा अधिकारी ने..

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लोक शिक्षण संचालनालय के स्पष्ट निर्देश के बाद भी जिले में कार्रवाई नहीं, बलौदाबाजार ने 12 शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजा

किरीट ठक्कर, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में वर्षों से विभिन्न शासकीय कार्यालयों में शिक्षकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) की व्यवस्था पर अब सरकार ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की समीक्षा बैठक के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश जारी करते हुये संलग्न कर्मचारियों एवं शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में कार्यमुक्त करने के आदेश दिये हैं। इसके बावजूद गरियाबंद जिले में अब तक इस आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका है।

जानकारी के अनुसार जिले में पिछले कई वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षक शिक्षण कार्य छोड़कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जिला मिशन समन्वयक (समग्र शिक्षा) कार्यालय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय, बीआरसी सहित अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में संलग्न हैं। इनमें कई शिक्षक वर्षों से कार्यालयीन कार्य करते हुये अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर अनेक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 25 जून 2026 को जारी पत्र क्रमांक एमआईएस/एन-123/445 में स्पष्ट निर्देश दिये हैं, कि समीक्षा बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा बीआरसी कार्यालयों सहित अन्य कार्यालयों में संलग्न सभी कर्मचारियों एवं शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल पदस्थापना संस्था के लिये कार्यमुक्त किया जाये। साथ ही किये गये पालन प्रतिवेदन की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में तत्काल संचालनालय को भेजने के निर्देश भी दिये गये हैं।

संचालनालय के आदेश के बाद प्रदेश के कई जिलों में कार्रवाई शुरू हो गई है। इसका उदाहरण बलौदाबाजार-भाटापारा जिला है, जहां जिला शिक्षा अधिकारी ने 30 जून 2026 को आदेश जारी कर विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से संलग्न 12 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेज दिया है। इनमें बीईओ कार्यालय, बीआरसी, कलेक्टर कार्यालय, छात्रावास तथा अन्य कार्यालयों में संलग्न शिक्षक शामिल हैं।

इसके विपरीत गरियाबंद जिले में अब तक किसी बड़े स्तर पर कार्यमुक्ति आदेश सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि जब संचालनालय के स्पष्ट निर्देश जारी हो चुके हैं और अन्य जिलों में उनका पालन भी शुरू हो गया है, तब गरियाबंद में कार्रवाई कब होगी।

शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि वर्षों से कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को विद्यालयों में वापस भेजा जाता है तो ग्रामीण और दूरस्थ स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। वहीं प्रशासनिक कार्यों के लिये आवश्यकतानुसार नियमित लिपिकीय एवं अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था करना शासन की जिम्मेदारी है,न कि शिक्षकों से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य लेना।

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