उदंती के 17 गांव बने वन भैंसा संरक्षण के साझेदार, छत्तीसगढ़ को ‘वाइल्ड बफैलो स्टेट’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम

मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुये, उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व (यूएसटीआर) के अंतर्गत आने वाले 17 ग्राम सभाओं के समुदाय, राज्य पशु जंगली भैंसा (वाइल्ड बफैलो) के संरक्षण और संवर्धन के लिये आगे आ रहे हैं ..

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किरीट ठक्कर, गरियाबंद। मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुये उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व (यूएसटीआर) के अंतर्गत आने वाले 17 ग्राम सभाओं के समुदाय, राज्य पशु जंगली भैंसा (वाइल्ड बफैलो) के संरक्षण और संवर्धन के लिये आगे आ रहे हैं।

आपको बता दें कि मध्य भारत के भूभाग में अब वन भैंसों की मौजूदगी वाला एकमात्र संरक्षित क्षेत्र उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व ही रह गया है, ऐसे में यह पहल छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिये महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

यूएसटीआर की वनभैंसा वंशावली – इनमें से नर छोटू ही जीवित है।

उदंती कोर क्षेत्र के इन 17 गांवों के वनवासी, अपने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार क्षेत्रों में वन विभाग के साथ मिलकर वन अग्नि नियंत्रण, अवैध कटाई रोकने, अतिक्रमण हटाने और वन्यजीवों के लिये प्राकृतिक रहवास विकसित करने, ठोस कदम उठाने तैय्यार हैं, कई स्थानों पर समुदायों ने स्वेच्छा से अतिक्रमित वन भूमि को खाली कर वन्यजीव गलियारों को पुनर्जीवित करने में सहयोग किया है।

वनवासी ग्रामीणों के साथ यूएसटीआर प्रशासन की बैठक

यूएसटीआर प्रशासन द्वारा 14 दिसम्बर 2025 को आयोजित बैठक में 17 गांवों के 57 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और शुद्ध वन भैंसों की आबादी को संरक्षित एवं बढ़ाने के लिये सामूहिक सहमति व्यक्त की। बैठक में ग्राम प्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

वन भैंसों की घटती संख्या को देखते हुये छत्तीसगढ़ वन विभाग ने पहले ही ठोस पहल की है, एक जानकारी के अनुसार, – वर्ष 2020 और 2023 में दो चरणों में असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान से 5 मादा और 1 नर वन भैंसा को बरनावापारा वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया था। तत्समय, यूएसटीआर क्षेत्र के अति-नक्सल प्रभावित होने के कारण उन्हें बरनावापारा में रखा गया था। आज बरनावापारा में इन वन भैंसों की संख्या बढ़कर 11 हो चुकी है, जिनमें 5 बछड़ों का जन्म शामिल है।

अब अंतर्प्रजनन को रोकने और मध्य भारतीय वन भैंसों के जीन पूल के संरक्षण के उद्देश्य से बरनावापारा से 3 मादा वन भैंसों को उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व लाने की तैयारी की जा रही है। इन्हें एकमात्र जीवित नर वन भैंसा ‘छोटू’ के साथ 45 दिनों की अनिवार्य क्वारंटाइन अवधि और रेडियो कॉलर लगाने के बाद प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ा जायेगा।

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वन भैंसा का पारिस्थितिक महत्व –

वन भैंसा एक मेगा हर्बिवोर प्रजाति है, जिसका पारिस्थितिक महत्व अत्यंत व्यापक है। उनकी चरने और रौंदने की आदतें घास के मैदानों को संतुलित रखती हैं, आर्द्रभूमि और नदी तटवर्ती पारिस्थितिक तंत्र को आकार देती हैं तथा अन्य शाकाहारी जीवों के लिये अनुकूल पर्यावास तैयार करती हैं।

यूएसटीआर की तैय्यारी –

वन भैंसों के स्वागत के लिये दंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में घास के मैदानों का विकास, खरपतवार नियंत्रण, वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा आधारित जल स्रोतों की स्थापना, 750 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने और अवैध शिकार विरोधी अभियानों जैसे कार्य लगातार किये जा रहे हैं। मानव-वन भैंसा संघर्ष को रोकने के लिये हाथी अलर्ट ऐप को अनुकूलित किया जायेगा तथा पैदल गश्ती के लिये ‘वन भैंसा मित्र दल’ तैनात होंगे। इसके साथ ही फसल एवं पशुधन क्षति के दावों के त्वरित निपटान हेतु ऑनलाइन मुआवजा पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिससे 30 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित हो सके।

गुजरात शेरों, मध्यप्रदेश बाघों और असम गैंडों के लिये जाना जाता है….

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सामुदायिक सहभागिता छत्तीसगढ़ को वन भैंसा संरक्षण के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिला सकती है, ठीक वैसे ही जैसे मध्य प्रदेश बाघों, गुजरात शेरों और असम गैंडों के संरक्षण के लिये जाना जाता है। छत्तीसगढ़ की इस पहल से प्रेरित होकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ने भी वन भैंसों की आबादी बढ़ाने की योजनाएं शुरू कर दी हैं। 

वरुण जैन, उपनिदेशक सीतानदी उदंति टाईगर रिजर्व

‘ वाइल्ड बफैलो स्टेट ’

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उप निदेशक के अनुसार, जब तक वन भैंसों की आबादी पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाती, तब तक इको-टूरिज्म गतिविधियां अन्य दुर्लभ प्रजातियों पर केंद्रित रहेंगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के लिये रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वनों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। वन और वनवासियों की साझेदारी से शुरू हुई यह पहल, भविष्य में छत्तीसगढ़ को ‘वाइल्ड बफैलो स्टेट’ के रूप में स्थापित करने की मजबूत आधारशिला बन सकती है।


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