हाईटेंशन पोल पर तारों का उलझा जाल : सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल

तारों का ऐसा उलझा हुआ जाल दिखाई दे रहा है कि पूरा खंभा मानो “तार-तार” हो गया हो। मौके पर..

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साजु चाको,बालोद बालोद शहर के नयापारा मंच के समीप स्थित एक हाईटेंशन बिजली के खंभे पर विभिन्न प्रकार के तारों का ऐसा उलझा हुआ जाल दिखाई दे रहा है कि पूरा खंभा मानोतारतारहो गया हो। मौके पर दिखाई देने वाली स्थिति में बिजली, इंटरनेट और केबल जैसी विभिन्न लाइनों के तार एक ही पोल पर अव्यवस्थित ढंग से उलझे नजर आते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन सभी तारों को संबंधित विभागों की अनुमति से लगाया गया है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिये। वहीं यदि किसी संस्था ने बिना अनुमति पोल का उपयोग किया है, तो यह भी जांच का विषय है कि इतनी लंबी अवधि तक संबंधित विभागों की निगरानी में यह स्थिति कैसे बनी रही।

विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में इस प्रकार खुले और उलझे हुये तार सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय बन सकते हैं। एक ही पोल पर अत्यधिक तारों का भार भविष्य में रखरखाव की कठिनाइयों और संभावित तकनीकी जोखिमों को बढ़ा सकता है।

तस्वीरों में यह भी प्रतीत होता है कि कई तार उचित क्लैंपिंग के बजाय आपस में उलझे हुए हैं। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि कौन-से तार विद्युत विभाग के हैं और कौन-से निजी इंटरनेट या केबल सेवा प्रदाताओं के। इसकी पुष्टि केवल संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और अभिलेखों से ही संभव है।

नागरिकों की प्रमुख मांग

– हाईटेंशन पोल पर लगे सभी तारों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाये।
– यह सार्वजनिक किया जाए कि किन-किन एजेंसियों को पोल उपयोग की अनुमति दी गई है।
– बिना अनुमति लगाये गये तारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाये।
– अनावश्यक, जर्जर एवं अनुपयोगी तारों को तत्काल हटाकर पोल को सुरक्षित बनाया जाये।

जनहित का सवाल

जब एक हाईटेंशन बिजली के खंभे पर तारों का इतना बड़ा जाल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, तो क्या संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा है ? यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिये, और यदि कहीं अनियमितता है तो उस पर समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।

(नोट: यह समाचार स्थल पर दिखाई दे रही स्थिति एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए गए जनहित संबंधी प्रश्नों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा अनुमति संबंधी तथ्य की अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच एवं अभिलेखों से ही होगी।)


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