भाजपा के वरिष्ठ नेता देवजी भाई पटेल ने नकटी कार्रवाई पर उठाये सवाल, सीएम को पत्र लिख कहा- पुलिस की क्रूरता उचित नही

हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दूधमुंहे शिशुओं तक को घरों से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने लिखा है कि ग्रामीणों की चीख-पुकार और पुलिस की कठोर कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का वातावरण बन गया।

100376542-400kb

किरीट ठक्कर, रायपुर। रायपुर जिले के धरसींवा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नकटी में चारागाह भूमि पर बसे ग्रामीणों के घरों को तोड़े जाने की प्रशासनिक कार्रवाई अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। कार्रवाई को लेकर जहां आम लोगों में नाराजगी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी विरोध के स्वर तेज हो गये हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं धरसींवा से लगातार तीन बार विधायक रहे देवजी भाई पटेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को तीन पृष्ठों का विस्तृत पत्र लिखकर कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

पटेल ने अपने पत्र में कहा है कि उन्होंने 3 जून 2025 को ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि ग्राम पंचायत नकटी की लगभग 15.4790 हेक्टेयर चारागाह भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का निर्माण निरस्त अथवा अन्यत्र स्थानांतरित किया जाये तथा गांव की वर्तमान बसाहट को यथावत रखा जाये, इसके बावजूद 29 जून 2026 को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्रामीणों के घरों पर कार्रवाई कर दी।

नकटी गांव अतिक्रमण कार्यवाही के बाद

पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई में 80 से 100 परिवार बेघर हो गये, हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दूधमुंहे शिशुओं तक को घरों से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने लिखा है कि ग्रामीणों की चीख-पुकार और पुलिस की कठोर कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का वातावरण बन गया।

देवजी भाई ने पुनर्वास व्यवस्था पर भी सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को नया रायपुर सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में भेजने की व्यवस्था की जा रही है, जबकि वहां न पर्याप्त पानी है, न बिजली और न ही ग्रामीणों के पशुधन के लिये कोई व्यवस्था, उनके अनुसार यह केवल औपचारिक पुनर्वास है,जबकि प्रभावित परिवार वर्षों से उसी गांव के निवासी हैं और उनकी आजीविका भी वहीं से जुड़ी है।

अपने पत्र में पूर्व विधायक ने चारागाह भूमि के संरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के ‘जगपाल सिंह बनाम पंजाब सरकार’ प्रकरण का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि सर्वोच्च न्यायालय ने चारागाह एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिये हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ शासन के 19 मार्च 2011 एवं 29 मई 2012 के राजस्व विभाग के पत्रों का हवाला देते हुये कहा कि चारागाह भूमि के संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं राज्य सरकार की है।

देवजी भाई पटेल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे इस पूरे मामले में स्वयं संज्ञान लें और जनहित को प्राथमिकता देते हुये विधायक कॉलोनी का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि “जनता के प्रति पुलिस की क्रूरता एवं कठोर कार्रवाई किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। प्रभावितों को अब केवल आपसे ही न्याय और संरक्षण की उम्मीद है।”

उधर, नकटी प्रकरण को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में भाजपा सरकार विपक्ष के भी निशाने पर आ गई है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है, जबकि भाजपा इसे पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों की पृष्ठभूमि से जोड़कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अधिक प्रभावित नकटी गांव के वे परिवार हैं, जिनके आशियाने इस कार्रवाई में उजड़ गये। प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि विधायक कॉलोनी का निर्माण आवश्यक भी था, तो क्या उसके लिये बरसात के मौसम में ऐसी कठोर कार्रवाई आवश्यक थी।

मुख्य खबरें

You cannot copy content of this page