पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग

जनहित से जुड़े मुद्दों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उठाने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्टों) तथा सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ कथित दुर्भावनापूर्ण..

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सरगुजा में दर्ज चार एफआईआर और काउंटर-वर्जन की समीक्षा की उठी मांग, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, डीजीपी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन सौंपने का उल्लेख

अम्बिकापुर, सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जनहित से जुड़े मुद्दों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उठाने वाले पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्टों) तथा सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ कथित दुर्भावनापूर्ण शिकायतों,चरित्र-हनन और आपराधिक कानूनों के संभावित दुरुपयोग का मामला चर्चा में है। इस संबंध में जागरूक नागरिकों और प्रभावित पक्षों की ओर से छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुये मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रेंज सरगुजा तथा पुलिस अधीक्षक सरगुजा सहित संबंधित अधिकारियों को विस्तृत आवेदन सौंपे जाने का उल्लेख किया गया है।

मांग की गई है कि संबंधित शिकायतों, प्राथमिकी, परस्पर विरोधी बयानों और डिजिटल साक्ष्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा की जाये,ताकि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई केवल आरोपों,आशंकाओं या बाहरी प्रभाव के आधार पर न हो।

जनहित के मुद्दे उठाने वालों पर दबाव बनाने का आरोप

आवेदन में आशंका जताई गई है कि सरगुजा जिले में प्रशासनिक कार्रवाई, सामाजिक घटनाओं और जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाने वाले कुछ पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को शिकायतों तथा कथित अपमानजनक टिप्पणियों के माध्यम से दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।

आवेदनकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल घटनाओं की जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जनसमस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाने का काम भी करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की जाती है, तो उसकी जांच उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिये।

हालांकि, किसी शिकायत का दुर्भावनापूर्ण होना या किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर चरित्र-हनन किया जाना जांच का विषय है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिये संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।

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