भानु प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों को बस यात्रा के दौरान किराये में मिलने वाली 100 प्रतिशत छूट का लाभ 80 वर्ष के बजाय 70 वर्ष की आयु से दिये जाने की मांग उठी है। छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन (अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ) के प्रांताध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, दुर्ग के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव के नेतृत्व में मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया है।
ज्ञापन में परिवहन विभाग द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को जारी राजपत्र (असाधारण) अधिसूचना में वरिष्ठ नागरिकों को बस किराये में छूट देने संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। संगठन ने शासन की इस पहल का स्वागत करते हुये छूट के लिये निर्धारित आयु सीमा को कम करने का आग्रह किया है।
70 वर्ष की आयु से मिले शत-प्रतिशत छूट
ज्ञापन के अनुसार, वर्तमान अधिसूचना की अनुसूची के कंडिका (1) (द) में बस किराये में 100 प्रतिशत छूट के लिये 80 वर्ष या उससे अधिक आयु निर्धारित की गई है। संगठन ने इस आयु सीमा को घटाकर 70 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिक योजना का लाभ उठा सकें।
इलाज के लिये करनी पड़ती है लंबी यात्रा
भानु प्रताप यादव ने कहा कि 70 वर्ष की आयु के बाद अनेक वरिष्ठ नागरिक हृदय रोग,मधुमेह,गठिया सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित होते हैं। ऐसे में उन्हें उपचार और स्वास्थ्य जांच के लिये जिला मुख्यालयों तथा बड़े अस्पतालों तक नियमित रूप से यात्रा करनी पड़ती है। सीमित आय और बढ़ते चिकित्सा खर्च के बीच बस किराये का भार भी बुजुर्गों के लिये परेशानी का कारण बनता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में 80 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित होने से 70 से 80 वर्ष के आयु वर्ग के अनेक वरिष्ठ नागरिकों द्वारा इस सुविधा का लाभ उठाने की संभावना कम है । यदि छूट की आयु सीमा 70 वर्ष कर दी जाती है, तो इससे बड़ी संख्या में बुजुर्गों को राहत मिल सकती है।
कल्याणकारी राज्य में बुजुर्गों को मिले राहत
संगठन ने अपने ज्ञापन में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना कल्याणकारी शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण दायित्व है। विशेषकर पेंशनरों और सीमित आय वाले बुजुर्गों को परिवहन सुविधा में राहत मिलने से उनकी आवश्यक यात्रायें आसान हो सकती हैं।
