गरियाबंद। प्रशासनिक व्यवस्था में अक्सर अधिकारियों / कर्मचारियों या शासकीय दफ्तरों में पदस्थ बाबुओं के विरुद्ध आम नागरिकों की शिकायतें देखने सुनने में आती है, किन्तु प्रजातांत्रिक व्यवस्था अनुसार उच्च पद पर आसीन निर्वाचित जनप्रतिनिधि को भी आम नागरिकों की तरह शिकवा-शिकायत करनी पड़े,तब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवालिया निशान के साथ–साथ सत्तारूढ़ सरकार के सुशासन के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह अंकित होता है।
एक ऐसे दौर में जब प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार के दावे है, सेवा-सुशासन का भी खूब प्रचार है, तब कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ एक बाबू पर कार्य में लापरवाही और मनमानी का आरोप और कोई नहीं बल्कि जनपद पंचायत के निर्वाचित अध्यक्ष लगा रहे हैं।
मामला जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत मंदिरों के जीर्णोद्धार से संबंधित है। मिली जानकारी के अनुसार गरियाबंद ब्लॉक के लगभग 13 गांवों में मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाना है, जिसके लिये कार्यालय जनपद पंचायत गरियाबंद द्वारा कलेक्टर को पत्र जारी कर मंदिरों के जीर्णोद्धार संबंधी प्रस्ताव, संभवतः जुलाई माह के दूसरे सप्ताह के प्रारम्भ में ही प्रेषित किया गया था।
प्रस्ताव का नियमानुसार परीक्षण कराकर कार्यपालन अभियंता द्वारा हस्ताक्षरित, मय कार्य स्थल का नक्शा, खसरा, ग्राम पंचायत प्रस्ताव, फोटोग्राफ्स,तकनीकी स्वीकृति,प्राक्कलन एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज के साथ संलग्न कर आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया था। किन्तु मामला लगभग 4 माह तक लंबित रहा है।
जनपद पंचायत गरियाबंद के अध्यक्ष सोहन ध्रुव ने इस मामले में कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड 2 विवेक टेमरे पर कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुये सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड 2 विवेक टेमरे द्वारा,मंदिर जीर्णोद्धार का प्रस्ताव 4 माह तक लंबित रखा जाना उल्लेखित है।
वर्षों से पदस्थ कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर सवाल
जनपद पंचायत अध्यक्ष सोहन ध्रुव ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारी लंबे समय से कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ हैं और अब उनके कामकाज को लेकर समस्या सामने आ रही है। उनका कहना है कि उक्त कर्मचारी द्वारा दस्तावेज लंबे समय तक लंबित रखने के बाद उनमें कमियां निकालकर वापस भेज दिया जाता है, जिससे विकास कार्यों की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
मंदिरों के जीर्णोद्धार जैसे स्थानीय विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों के लंबे समय तक लंबित रहने के आरोप ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े किये हैं। यदि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद प्रस्ताव अनावश्यक रूप से लंबित रखे गये हैं, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय किया जाना जरूरी है।
