“मोर जमीन-मोर खाद” डिजिटल पोर्टल्स के जरिये किसानों को मिलेगा उर्वरक

पोर्टल केवल बड़े या निजी पट्टाधारकों के लिये नहीं है। सरकार ने समावेशी व्यवस्था सुनिश्चित की है जिसके तहत वनाधिकार पत्र प्राप्त किसानों का डेटा भी पोर्टल पर दर्ज होगा। जो किसान दूसरों की जमीन पर रेगहा-अधिया खेती..

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छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग द्वारा “मोर जमीन-मोर खाद” जैसी पहल और डिजिटल पोर्टल्स के जरिये किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक (खाद-बीज) उपलब्ध कराया जा रहा हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बिचौलियों पर लगाम लगाना, कालाबाजारी रोकना और राज्य के किसानों को पारदर्शी तरीके से सही समय पर पंजीकृत रकबे के आधार पर कृषि आदान (खाद) उपलब्ध कराना है।

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के अनुसार, राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है। किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार ही उर्वरक आंबटन किया जायेगा। इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी। निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों पर सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं।

जरूरत आधारित कोटा और पारदर्शी वितरण

कृषि विशेषज्ञों के माध्यम से मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखकर फसलों के लिये तय किये गये वैज्ञानिक मापदंडों व कोटे के आधार पर ही खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि जमीन खराब न हो। यूरिया के अत्यधिक इस्तेमाल से जमीन को होने वाले नुकसान से बचाने के लिये स्थानीय स्तर पर जैविक खाद और नील-हरित काई जैसी चीजों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसे यूरिया के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

किसानों को सुविधा

राज्य सरकार ने उर्वरक वितरण प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिये इस पोर्टल को लॉन्च किया है। इस पोर्टल से ऋणी किसान अब आसानी से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के माध्यम से अपना पंजीयन करा सकेंगे। किसानों की सुविधा को देखते हुये अब चॉइस सेंटरों को भी पोर्टल पर पंजीयन की अनुमति दी गई है। जिससे किसानों को लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा प्रत्येक खरीफ एवं रबी सीजन के लिये किसानों को उनकी फसल और रकबे के अनुसार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन टोकन दिया जायेगा। इससे खाद वितरण केंद्रों पर भीड़ नहीं लगेगी और किसान को तय समय पर खाद मिल सकेगा।

पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक कृषि एवं उद्यानिकी फसलों के लिये क्रॉप कैलेंडर के अनुरूप खाद के उठाव की व्यवस्था की गई है। इससे वैज्ञानिक पद्धति से खेती को बढ़ावा मिलेगा।

वन अधिकार पट्टे का भी डेटा : अधिया- रेगहा का पंजियन पृथक से

दावा है कि पोर्टल केवल बड़े या निजी पट्टाधारकों के लिये नहीं है। सरकार ने समावेशी व्यवस्था सुनिश्चित की है जिसके तहत वनाधिकार पत्र प्राप्त किसानों का डेटा भी पोर्टल पर दर्ज होगा। जो किसान दूसरों की जमीन पर रेगहा-अधिया खेती कर रहे हैं, उनके लिये भी अलग पोर्टल के माध्यम से पंजीयन की विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही विशेष परिस्थितियों वाली जमीनों का भी सटीक रिकॉर्ड रखा जायेगा ताकि कोई भी पात्र किसान खाद से वंचित न रहे।

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