संरक्षित वन में हरे-भरे वृक्षों की कटाई, शिकायत के 5 दिन बाद दर्ज हुआ पीओआर

मामला नवागढ़ वन परिक्षेत्र के बीट क्रमांक 696 का है। संबंधित स्थल गांव के बिल्कुल नजदीक है। यहां शासकीय हाई स्कूल के लिये..

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नवागढ़ रेंज के बीट क्रमांक 696 का मामला, गांव के नजदीक कटे फलदार वृक्ष : कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

किरीट ठक्कर, गरियाबंद। वन मंडल गरियाबंद के अंतर्गत नवागढ़ वन परिक्षेत्र में संरक्षित वन क्षेत्र के हरे-भरे फलदार वृक्षों की अवैध कटाई की जानकारी और तस्वीरें सामने आई है। गांव-बस्ती से लगी वनभूमि पर पांच – छह से अधिक हरे-भरे फलदार वृक्षों को कुल्हाड़ी से काटे जाने के मामले में ग्रामीण रुपई बाई कुर्रे ने 6 अक्टूबर को वन परिक्षेत्र कार्यालय में नामजद लिखित शिकायत की थी। इसके बावजूद कार्रवाई में देरी हुई। अब जाकर वन विभाग ने मामले में पीओआर दर्ज किया है।

हालांकि,शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में पांच दिन का समय क्यों लगा और पीओआर में किन लोगों को जिम्मेदार माना गया है, यह सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है।

गांव के नजदीक कटे हरे-भरे वृक्ष

मामला नवागढ़ वन परिक्षेत्र के बीट क्रमांक 696 का है। संबंधित स्थल गांव के बिल्कुल नजदीक है। यहां शासकीय हाई स्कूल के लिये अतिरिक्त कक्ष का निर्माण हुआ है, जबकि पास में ही धान उपार्जन केंद्र भी स्थित है। इस कारण क्षेत्र में दिनभर ग्रामीणों की आवाजाही बनी रहती है।

इसके बावजूद संरक्षित वन क्षेत्र में लगे फलदार वृक्षों की कटाई हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कुछ रसूखदार लोगों ने पांच – छह से अधिक हरे-भरे वृक्ष कटवा दिये। घटना की जानकारी मिलने के बाद भी वन अमले ने तत्काल कार्रवाई नहीं की।

मोबाइल पर सूचना, फिर भी कार्रवाई में देरी

ग्रामीणों के मुताबिक, घटना की जानकारी कुछ वन कर्मियों को मोबाइल फोन के माध्यम से भी दी गई थी। इसके बाद 6 अक्टूबर को ग्रामीण रुपई बाई कुर्रे ने नवागढ़ वन परिक्षेत्र कार्यालय में नामजद लिखित शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।

कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मामले को गांव में ही आपसी सलाह-मशविरे से निपटाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन शिकायतकर्ता इसके लिये तैयार नहीं हुआ। हालांकि, इस संबंध में किसी दबाव या समझौते की कोशिश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रेंजर ने कहा था—कार्रवाई की जायेगी

9 अक्टूबर को वन परिक्षेत्र अधिकारी बी.आर.सोरी से दूरभाष पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रशिक्षण में होने की जानकारी देते हुये बताया था कि मामला उनके संज्ञान में है और कार्रवाई की जायेगी।

इसके बाद आज 10 अक्टूबर को संबंधित बीटगार्ड से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में कार्रवाई की जा रही है। काटे गये वृक्षों की बाड़बंदी किये जाने की जानकारी भी सामने आई है। वन विभाग ने अब इस मामले में पीओआर दर्ज कर लिया है।

अब पीओआर में नाम और कार्रवाई का विवरण अहम

इस मामले में पीओआर दर्ज होने के बाद महत्वपूर्ण यह होगा कि वन विभाग ने किन व्यक्तियों की भूमिका को चिह्नित किया है, और आगे क्या वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जबकि शिकायत पत्र में चार लोगों के नाम उल्लेखित है। साथ ही, 6 अक्टूबर को लिखित शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में हुई देरी के कारणों की भी स्पष्टता जरूरी है।

संरक्षित वन क्षेत्र में हरे-भरे वृक्षों की कटाई केवल स्थानीय विवाद का विषय नहीं, बल्कि वन संरक्षण और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा मामला है। ऐसे में पीओआर दर्ज करने के बाद की कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है, इस पर भी सवालिया निशान हैं।

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