ग्रिड विद्युतीकरण के लिये 849.49 करोड़ की आवश्यकता
किरीट ठक्कर, गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड अंतर्गत राजापड़ाव क्षेत्र की पांच ग्राम पंचायतें—भुतबेडा, कुचेंगा, कोकडी, गरहाडीह एवं गौरगांव—आज भी आज़ादी के 78 वर्षों बाद बिजली से वंचित हैं। इन पंचायतों के पाराटोला एवं आश्रित ग्रामों के हजारों ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र के कांग्रेस नेता संजय नेताम ने बताया कि, इन ग्राम पंचायतों के लिये पूर्व में विद्युतीकरण कार्य की स्वीकृति मिल चुकी थी और कार्य प्रारंभ भी हुआ था, लेकिन वर्ष 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह कार्य तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
ग्रामीण कहते है कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। साथ ही रोजगार, सिंचाई और लघु उद्योग ठप पड़े हैं। स्वास्थ्य, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर भी अंधेरा छाया हुआ है। हालात से जनप्रतिनिधि और ग्रामीण हताश एवं क्षुब्ध हैं।
परंपरागत ग्रिड विद्युतीकरण के लिये 849.49 करोड़ की आवश्यकता, संरक्षित क्षेत्र में भूमिगत केबल हेतु अनुमति भी आवश्यक
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्युशन लिमिटेड के कार्यपालन अभियंता के अनुसार भूतबेड़ा, कोचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह, गौरगांव, शोभा, अड़गड़ी, गोना के पाराटोला एवं आश्रित ग्राम इस प्रकार गरियाबंद जिले में कुल 53 ग्राम वर्तमान में सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युतीकृत हैं।
इन 53 ग्रामों में राजापड़ाव क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के विनियम के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य संरक्षण रिजर्व, सामुदायिक रिजर्व) में विद्युतीकरण यथा-33 केव्ही एवं इससे निम्न वोल्टेज की विद्युत लाईनों के लिये भूमिगत केबल के माध्यम से किये जाने पत्र लिखा गया है।
उक्त 53 गांवों में परंपरागत विद्युतीकरण के लिये, कुल राशि 849.49 करोड़ रुपये अनुमानित बजट की आवश्यकता होगी। जिसका प्रस्ताव भेजा गया है।
उक्त ग्रामों को परंपरागत तरीके से विद्युतीकरण हेतु अत्यधिक बजट, फंड की आवश्यकता है। बजट की व्यवस्था एवं वन विभाग से अनुमति के बाद उक्त ग्रामों का विद्युतीकरण कार्य किया जाना संभव होगा।
14 घंटे तक रहा जाम, अब आवागमन शुरू
मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों संजय नेताम, लोकेश्वरी नेताम, पूरण मेश्राम के नेतृत्व में आंदोलनकारी ग्रामीणों ने अपनी मांग को लेकर 14 घंटे तक चक्का जाम कर दिया था, जिसके बाद वहां पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद चक्का जाम समाप्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि आगामी 2025-26 के बजट में इस क्षेत्र में विद्युतीकरण योजना को शामिल किया जायेगा, और 6 माह काम शुरू कर दिया जायेगा।







