रायपुर। शासन की योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और जनता तक तथ्यपरक जानकारी समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जनसंपर्क विभाग द्वारा एक नया और महत्वपूर्ण प्रयोग शुरू किया जा रहा है। अब प्रदेश के सभी विभागों और जिला प्रशासन को मीडिया के साथ नियमित संवाद बनाये रखना अनिवार्य होगा। कलेक्टरों को हर महीने प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी होगी, जबकि विभागीय सचिवों को तीन माह में एक बार मीडिया को संबोधित करना होगा।
मुख्यमंत्री स्वयं जनसंपर्क विभाग के प्रभारी मंत्री हैं, इसलिये माना जा रहा है कि यह निर्देश उनकी मंजूरी के बाद ही जारी किये गये होंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा।
इस मामले में जनसंपर्क सचिव द्वारा स्पष्ट निर्देश पत्र जारी किया गया है, जारी पत्र में शासन की छवि मजबूत करने, पारदर्शिता कायम रखने और जनता तक सही तथा समयबद्ध जानकारी पहुंचाने के लिये विभागों और जिलों को 9 प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल प्रभाव से अमल करने को कहा गया है।
जारी किये गये पत्र के अनुसार – प्रत्येक विभाग और जिला प्रशासन को प्रतिदिन सकारात्मक और नकारात्मक समाचारों की समीक्षा करनी होगी। नकारात्मक समाचारों पर तुरंत अधिकृत प्रतिक्रिया या तथ्यात्मक जानकारी जारी की जायेगी। दैनिक अपडेट विभागीय PRO के माध्यम से मीडिया को दिये जायेंगे।
सोशल मीडिया पर भी गतिविधियों का नियमित प्रसारण अनिवार्य किया गया है, ताकि योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी व्यापक रूप से साझा हो सके। हर विभाग को तिमाही में कम से कम एक प्रेस ब्रीफिंग करनी होगी। बड़े प्रोजेक्ट या स्वीकृति के मामलों में इंफोग्राफिक्स सहित त्वरित प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश हैं।
पत्रकारों के साथ सहभागिता पर जोर
नई व्यवस्था के तहत शासन ने मीडिया को विकास यात्रा का सहभागी बनाने का स्पष्ट इरादा जताया है। पत्रकारों को महत्वपूर्ण परियोजनाओं का मैदानी भ्रमण कराया जायेगा।
मीडिया संगोष्ठी और फ्रेंडली मैच आयोजित कर पत्रकारों और विभागों के बीच बेहतर संवाद को बढ़ावा दिया जायेगा।
मीडिया – शासन और जनता के बीच सबसे मजबूत पुल
यह निर्देश इस बात को रेखांकित करते हैं कि शासन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और अपरिहार्य है। जनता तक योजनाओं की सही और स्पष्ट जानकारी पहुंचाने में मीडिया ही सबसे प्रभावी माध्यम है।
शासन का मानना है कि नियमित संवाद से न केवल गलतफहमियां दूर होंगी, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति और उपलब्धियां भी समय पर सामने आ सकेंगी। विभागों को चेतावनी भी दी गई है कि इन निर्देशों में किसी प्रकार की ढिलाई शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
इस नई पहल से यह स्पष्ट हो रहा है कि राज्य सरकार अब मीडिया को केवल सूचना वाहक नहीं, बल्कि सहभागी साझेदार के रूप में देख रही है। यदि इस व्यवस्था को ईमानदारी पूर्वक लागू किया गया तो इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ जनता और शासन के बीच अविश्वास की खाई को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।







