बारिश का पानी रोकने ठोस योजना का अभाव – शिव सेना

जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता…

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स्टॉप डेम में कड़ी शटर नहीं, एनीकेट के गेट खराब, बांधों की स्थिति चिंताजनक

साजू चाको, बालोद। प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर शिव सेना ने व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन ने घोषणा की है कि पहले चरण में विभिन्न जिलों में ज्ञापन सौंपकर वर्षा के जल को संचित करने की ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की जायेगी।

शिव सेना प्रदेश सचिव शंकर चैनानी ने बताया कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण बारिश का कीमती पानी व्यर्थ बह रहा है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में लाखों की संख्या में स्टॉप डेम, एनीकेट और छोटे बांध निर्मित किये गये हैं, जिसका उद्देश्य गर्मी के दिनों में भू – जलस्तर बढ़ाना और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

लेकिन, चैनानी के अनुसार, अधिकांश स्टॉप डेमों में कड़ी शटर नहीं लगाये गये हैं, कई एनीकेटों के गेट खराब पड़े हैं, और छोटे बांधों की मरम्मत न होने से जल संरक्षण की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन संसाधनों की देखरेख नहीं की गई, तो आने वाले ग्रीष्मकाल में पीने के पानी की भारी किल्लत, कृषि सिंचाई संकट, और पशु-पक्षियों के लिये भी जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाये, तो शिव सेना पूरे प्रदेश में जन आंदोलन प्रारंभ करेगी।

इस अवसर पर भारतीय कामगार सेना प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कुमार, शिव सेना बालोद जिला प्रभारी हर्ष शर्मा, जिला महासचिव बालमुकुंद अग्रवाल, जिला संगठन मंत्री कुमार सिंह हिरवानी, महिला सेना जिला अध्यक्ष शकुंतला देवांगन, भारतीय कामगार सेना जिला अध्यक्ष चेतन साहू, जिला उपप्रमुख चंदन सोनकर, और नगर प्रमुख अनिल राजपूत उपस्थित थे।

सभी पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि जल संरक्षण पर सरकार की कोई ठोस नीति नहीं दिख रही है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में जनता को पानी के लिए त्राहि-त्राहि करनी पड़ेगी, जबकि प्रशासन केवल नियम और प्रतिबंध लागू करने में व्यस्त रहेगा।


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