आयुष्मान भारत योजना में छह महीने से भुगतान लंबित : आंशिक भुगतान, अनावश्यक अस्वीकृति और देरी ने बढ़ाई अस्पतालों की चिंता..

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साजु चाको, बालोद। केंद्र सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) आज स्वयं संकट में नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों के निजी और सरकारी अस्पतालों ने इस बात पर चिंता जताई है कि पिछले 6 महीनों से योजना के तहत किये गये इलाज की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही, वर्ष 2023-2024 के दावों का केवल आंशिक भुगतान किया गया है और कई क्लेम बिना उचित कारण के अस्वीकृत कर दिये जा रहे हैं।
अस्पतालों पर वित्तीय दबाव बढ़ा।
छत्तीसगढ़ राज्य के कई प्रमुख निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स ने जानकारी दी है कि जनवरी 2025 से अब तक उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत हजारों मरीजों का इलाज किया, परंतु अभी तक सरकार की तरफ से उनका पूरा भुगतान नहीं मिल पाया है। कई अस्पतालों ने बताया कि उन्हें 3 से 4 करोड़ रुपये तक की राशि मिलनी बाकी है।
इस भुगतान में देरी से अस्पतालों पर दवा खरीदने, स्टाफ की सैलरी देने और मेडिकल सामग्री की व्यवस्था करने में गंभीर कठिनाइयाँ आ रही हैं। छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों को तो संचालन में संकट का सामना करना पड़ रहा है।
2023-2024 के दावे भी अधूरे भुगतान में अटके।
पिछले वित्तीय वर्ष के क्लेम में भी भुगतान अधूरा रह गया है। कुछ अस्पतालों का कहना है कि 40% से 60% तक ही भुगतान किया गया है, जबकि शेष रकम के लिए महीनों से पोर्टल और हेल्पडेस्क पर फॉलोअप किया जा रहा है।
राज्य स्तर पर योजना की निगरानी करने वाली राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) की ओर से भी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, जिससे अस्पतालों में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
अनावश्यक क्लेम अस्वीकृति : एक गंभीर समस्या 
अस्पतालों का आरोप है कि क्लेम प्रोसेसिंग के दौरान बिना ठोस कारण के कई दावे अस्वीकृत किये जा रहे हैं।
कुछ सामान्य कारण जिनके आधार पर क्लेम रिजेक्ट हो रहे हैं
•डिस्चार्ज समरी अस्पष्ट
•ऑथराइजेशन लेटर में त्रुटि
•डुप्लीकेट क्लेम
•समय सीमा से बाहर दस्तावेज़
•अतिरिक्त जांच की आवश्यकता।
हालांकि अस्पतालों का कहना है कि उन्होंने सभी दस्तावेज़ तय नियमों के तहत अपलोड किये हैं, और फिर भी तकनीकी या प्रशासनिक बहाने बनाकर भुगतान से वंचित रखा जा रहा है।
अस्पतालों ने दी चेतावनी 
कई निजी अस्पतालों ने अब चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में भुगतान की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नई मरीजों की भर्ती पर रोक लगाने पर मजबूर होंगे। इससे योजना के लाभार्थी — जो आमतौर पर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर असर 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो इससे न केवल अस्पतालों की संचालन व्यवस्था चरमरायेगी, बल्कि इस योजना पर लोगों का भरोसा भी कमजोर हो सकता है।
इसके अलावा, लगातार अस्वीकृत हो रहे दावों से यह संदेश जाता है कि सरकार की क्लेम प्रोसेसिंग प्रणाली पारदर्शी नहीं है। इससे भविष्य में अस्पताल इस योजना से हटने की सोच सकते हैं, जो कि देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा साबित होगा।
आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि भुगतान प्रणाली पारदर्शी, त्वरित और उत्तरदायी हो। यदि अस्पतालों को समय पर भुगतान और वाजिब क्लेम का निपटारा नहीं मिलेगा, तो योजना अपने उद्देश्य — हर गरीब को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज  से भटक जाएगी।
सरकार और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाएं।

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