प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष–उपाध्यक्ष आमने-सामने
गरियाबंद। छुरा जनपद पंचायत में प्रभारी कार्यपालन अधिकारी सतीश चंद्रवंशी की कार्यप्रणाली पर अध्यक्ष – उपाध्यक्ष और सभापतियों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी सहित कुछ सभापति सीईओ की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अध्यक्ष मीरा ठाकुर सीईओ की पैरवी कर रही है।

बुधवार को इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई थी, जहां कुछ लोगों के अनुसार अध्यक्ष को लेकर चर्चा रही कि वें अपनी ही पार्टी के जनपद उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी एवं सभापतियो के पक्ष में ना रहकर प्रभारी सीईओ सतीश चन्द्रवंशी के पक्षधर हो गई है जो अनेकों सवाल पैदा करता है।
इन्ही जनपद सदस्यों की बदौलत अध्यक्ष बनने वाली मीरा ठाकुर दस माह में सदस्यों के बजाय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रभारी सीईओ की पैरवी करती नजर आई ।
बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत छुरा में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनपद अध्यक्ष श्रीमती मीरा ठाकुर ने प्रभारी सीईओ पर लगाये गये सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुये, उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। अध्यक्ष ने कहा कि प्रभारी सीईओ जनपद के विकास कार्यों को नियमों के तहत संचालित कर रहे हैं और उन पर लगाये जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं।
वहीं, जनपद उपाध्यक्ष और विभिन्न सभापतियों ने अध्यक्ष के बयान से असहमति जताते हुये मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, उपाध्यक्ष और सभापतियों का कहना है कि यदि पूरे मामले की जांच कराई जाती है तो “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जायेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद पंचायत में फर्जीवाड़ा और मनमानी से जुड़े मामलों की शिकायतें सही हैं और इनकी जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे जनपद पंचायत छुरा के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि जनपद पंचायत में सीईओ को लेकर मतभेद गहरे हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह के आपसी विवाद का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ सकता है। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनपद पंचायत इस विवाद को सुलझाकर जनहित और विकास कार्यों को प्राथमिकता देती है या फिर आपसी तनातनी के कारण क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जनपद पंचायत छुरा द्वारा मात्र दस माह में पंच सरपंच बैठक में भत्ता के नाम पर बाईस लाख रुपये का ब्यय बताया है जो जांच का विषय है।







