गरियाबंद। कतिपय अखबारों में 24 नवंबर को प्रकाशित खबर “प्रधानमंत्री ने एक हजार परिवारों को ऐसे गृह में प्रवेश कराया, जिनका प्लास्टर हुआ न छत ढली” पर जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुये तथ्यात्मक जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।
कलेक्टर गरियाबंद द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के संचालक, नवा रायपुर को भेजे गये प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि जिले में किसी भी अपूर्ण आवास में गृह प्रवेश नहीं कराया गया है।
प्रतिवेदन के अनुसार जिला पंचायत स्तर से गठित टीम — विजय साहू (जिला समन्वयक PMAY-G), अजीत शर्मा (सहायक अभियंता PMAY-G) एवं जितेन्द्र पाठक (तकनीकी समन्वयक MGNREGA) — ने 24 नवंबर को ग्राम सरईपानी, उसरीजोर, गोढियारी, धनोरा, मुड़गेलमाल और अमलीपदर में पहुँचकर संबंधित हितग्राहियों के आवासों का भौतिक निरीक्षण किया।
निरीक्षण से पूर्व शिकायतकर्ता परमेश्वर जैन को सूचित किया गया था, किन्तु निरीक्षण के दौरान वे उपस्थित नहीं रहे।
जिले में निरीक्षण के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार रहे –
* सरईपानी, गोढियारी, मुडगेलमाल और अमलीपदर के सभी चिन्हित आवास पूर्ण पाये गये।
* उसरीजोर में हितग्राही का आवास निर्माणाधीन (लेंटर स्तर) पाया गया तथा ऐसे अपूर्ण आवास में गृह प्रवेश नहीं कराया गया था।
* धनोरा में दो आवास निर्माणाधीन अवस्था में मिले। पूर्व शिकायतों में दोषी पाये गये रोजगार सहायक पर वसूली की कार्रवाई की जा चुकी है तथा रोजगार सहायक एवं आवास मित्र ने त्यागपत्र भी दे दिया है।
निरीक्षण टीम ने सभी आवासों का जियोटैग आवास सॉफ्टवेयर में मिलान कर यह प्रमाणित किया कि जहां गृह प्रवेश कराया गया है, वे आवास पूर्ण रूप से तैयार थे।
कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि—
“अपूर्ण आवासों में कहीं भी गृह प्रवेश नहीं कराया गया है तथा सभी जियोटैग नियमानुसार किये गये हैं।”







